मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बजट भाषण में इसकी घोषणा की है। हिमाचल में कई लोग किडनी की बीमारी से परेशान हैं। ऐसे में लोगों को नजदीकी अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध हो, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने काम करना शुरू कर दिया है। डायलिसिस शरीर से अपशिष्ट उत्पादों और अतिरिक्त फ्लूड को हटाने की एक कृत्रिम प्रक्रिया है। इसकी जरूरत तब होती है, जब किडनी ठीक से काम नहीं करती।
कई कारणों से लोगों को डायलिसिस की जरूरत हो सकती है, लेकिन रक्त से अपशिष्ट उत्पादों को पर्याप्त रूप से फिल्टर करने के लिए किडनी की अक्षमता सबसे आम है। किडनी फेलियर से पीड़ित लोगों में रक्त परीक्षण से पता चलता है कि किडनी अब अपशिष्ट उत्पादों को पर्याप्त रूप से फिल्टर नहीं कर सकती है। इसके बाद डॉक्टर तब तक डायलिसिस जारी रखते हैं, जब तक किडनी की कार्यक्षमता पर्याप्त रूप से ठीक नहीं होती।
राशनकार्ड से जुडे़गा परिवार रजिस्टर
पंचायतीराज विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार रजिस्टर सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य प्रदेश के लगभग 76 लाख ग्रामीण नागरिकों का आधार आधारित सत्यापन कर डिजिटल परिवार रजिस्टर तैयार करना है। अब तक 24.34 लाख लोगों का सत्यापन हो चुका है जबकि शेष 51.66 लाख लोगों का सत्यापन काम प्रगति पर है। सर्वेक्षण के दौरान परिवार के प्रत्येक सदस्य का आधार कार्ड अथवा फेस स्कैन से सत्यापन किया जाएगा। इसके साथ ही राशन कार्ड को परिवार रजिस्टर से जोड़ा जाएगा ताकि सभी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सके।
पंचायतीराज विभाग का कहना है कि यह सर्वेक्षण राशन कार्ड, बीपीएल, पेंशन, आवास योजना जैसे सरकारी लाभों को पात्र लाभार्थी तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा। इसके साथ ही गाय, बैल, भैंस आदि पशुधन का भी पंजीकरण किया जाएगा। इससे बेसहारा पशुओं की पहचान और बेहतर प्रबंधन संभव होगा। ग्रामीण जनता से ग्राम पंचायत सचिव अथवा अधिकृत सर्वेक्षण कर्मियों को उचित जानकारी प्रदान करने में पूरा सहयोग करने का आह्वान किया।