कमरे में जाकर देखा तो उनका बेटा सुनील हाथ में कुल्हाड़ी जैसा लोहे का हथियार लिए खड़ा था, जबकि उनके पति चारपाई पर घायल अवस्था में पड़े थे। इसके बाद उन्होंने बाहर से कमरे की कुंडी लगाकर पुलिस और ग्रामीणों को सूचना दी। घायल खुशहाल सिंह को उपचार के लिए सिविल अस्पताल शाहपुर ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 25 गवाहों के बयान, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्य अदालत में पेश किए। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई। मामले की पैरवी उप जिला न्यायवादी विवेक डोगरा ने राज्य की ओर से की।