धर्मशाला में अपना अंतिम शीत सत्र आयोजित कर रही जयराम सरकार पहले ही दिन सड़क से लेकर सदन तक में घिरती दिखी। उपचुनाव में मिली हार के बाद वैसे तो सरकार मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के विधानसभा के भीतर आक्रामक रहने का अंदाजा लगाए बैठी थी, लेकिन माकपा विधायक की मदद से विपक्ष ने पहले ही दिन अविश्वास प्रस्ताव के जरिये सरकार को घेरने का नया पैंतरा चल दिया। हालांकि, संख्या बल में कमी की तकनीकी खामी को नियमों की ढाल के जरिये पकड़कर सरकार ने अपना बचाव जरूर कर लिया, लेकिन इधर राहत पा रही सरकार को विधानसभा के बाहर नाराज प्रदर्शनकारियों ने जूझना पड़ा।
हालात इतने खराब हो गए कि सरकार को प्रदर्शनकारियों के आगे झुकना पड़ा और उनकी मांग के अनुसार लिखित में एलान भी करना पड़ा। शनिवार को एनपीएस समेत कई अन्य संगठनों ने भी प्रदर्शन का एलान कर रखा है। चूंकि, सरकार के प्रदर्शनकारियों के आगे झुककर जनता पर अपनी कमजोर पकड़ को जाहिर कर दिया है। ऐसे में अब चुनावी साल की शुरुआत से पहले अन्य संगठन भी सरकार पर पूरा दबाव बनाने का प्रयास करेंगे। उधर, विपक्ष ने भी अपने तरकश में रखे तीरों को छोड़ना शुरू कर दिया है। ऐसे में यह साफ है कि सरकार के लिए यह सत्र कांटों भरी राह से कम नहीं रहेगा।