जयराम ठाकुर ने कहा कि यदि व्यक्ति लक्ष्य निर्धारित कर ले, तो उसे मेहनत से प्राप्त किया जा सकता है। सफलता आनंद देती है, जबकि विफलता संघर्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। खेल में जीत-हार स्वाभाविक है, लेकिन हार के बाद रुकना नहीं चाहिए। कुलपति ने कहा कि यह प्रतियोगिता केवल कबड्डी खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला सशक्तीकरण का सशक्त माध्यम भी है।
पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पूजा ठाकुर ने कहा कि इसी मैदान से 4-5 खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जो गर्व की बात है। ललिता शर्मा ने कहा कि उन्होंने धर्मशाला के साई ग्राउंड में एक ऐसे खेल वातावरण का सपना देखा था, जहां सभी खेलें और विशेष रूप से लड़कियों को खेलने के समान अवसर मिले। सांसद राजीव भारद्वाज ने खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही बेटियों की सराहना की।