दलाई लामा को मिले नोबल पुरस्कार की 36वीं वर्षगांठ पर मुख्य अतिथि व अन्य।
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तिब्बती आध्यात्मिक गुरु 14वें दलाई लामा को 1989 में प्रदान किए गए नोबेल शांति पुरस्कार की 36वीं वर्षगांठ पर चिली संसद के तिब्बत मित्र समूह और अमीगोस डेल तिब्बत–चिली ने तिब्बती लोगों के प्रति अपना समर्थन दोहराया है। प्रतिनिधिमंडल ने चीन सरकार से अपील की कि वह दलाई लामा के प्रतिनिधियों के साथ बिना किसी पूर्व शर्त के पुनः संवाद शुरू करे। इस प्रतिनिधिमंडल में रिपब्लिक ऑफ चिली के सांसद व्लाडो मिरोसेविक वेर्दुगो, तोमास रेने हिर्श, एना मारिया गाजमुरी, लुइस फाबियन माला शामिल रहे। इसके अतिरिक्त अमिगोस डेल तिबेत–चिली संगठन से फर्नांडो सालिनास, बारबरा सालिनास और कातालिना सालिनास भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे।
संगठन ने कहा कि वे दलाई लामा के अहिंसा, करुणा और चीन-तिब्बत विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति उनके अटूट संकल्प को सम्मानपूर्वक नमन करते हैं। साथ ही तिब्बत से जुड़े तीन गंभीर मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का तत्काल ध्यान आकर्षित किया गया है। पहला मुद्दा जिसमें 15वें दलाई लामा की मान्यता पर चीन के दावों का विरोध शामिल है। समूह ने दलाई लामा के आधिकारिक बयानों का पूर्ण समर्थन करते हुए चीन सरकार के उन दावों को सख्ती से खारिज किया है, जिनमें कहा गया है कि अगले 15वें दलाई लामा की मान्यता चीन की सीमा के भीतर तथाकथित गोल्डन अर्न प्रक्रिया से और चीनी स्वीकृति के साथ होनी चाहिए। बयान में कहा गया है कि यह मांग बौद्ध परंपराओं, धार्मिक स्वतंत्रता और दलाई लामा के अधिकारों का खुला उल्लंघन है। दलाई लामा ने 2011 में और पुनः 2025 में स्पष्ट किया था कि भविष्य के दलाई लामा की मान्यता का एकमात्र अधिकार गदेन फोड्रांग ट्रस्ट को है। इस प्रक्रिया में किसी अन्य को हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है।
दूसरा मुद्दा जिसमें समूह ने अपने बयान में कहा गया है कि तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद से तिब्बतियों की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान को नष्ट किया गया है। धार्मिक स्वतंत्रता पर कठोर नियंत्रण, मठों का ध्वंस, बिना सहमति के समुदायों का विस्थापन, अभिव्यक्ति और आवाजाही की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध, मनमानी हिरासत, राजनीतिक कैद, यातना और गुमशुदगियां ये सभी गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन हैं। समूह ने मांग की है कि चीन तात्कालिक रूप से तिब्बत में सभी मानवाधिकार उल्लंघन रोके और अंतरराष्ट्रीय समुदाय निर्णायक हस्तक्षेप करे। तीसरे मुद्दे में शांतिपूर्ण आंदोलन और मध्य मार्ग नीति का समर्थन शामिल है। समूह ने कहा कि मध्य मार्ग नीति ही चीन-तिब्बत मुद्दे के समाधान का सबसे व्यावहारिक रास्ता है। अंत में संगठन ने कहा कि इस वर्षगांठ पर वह दलाई लामा की करुणा और अहिंसा की विरासत को नमन करते हैं और तिब्बती जनता के न्याय, स्वतंत्रता, गरिमा तथा सांस्कृतिक अस्तित्व की लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं। वहीं शिमला में तिब्बती समुदाय ने 14वें दलाई लामा को मिले नोबेल शांति पुरस्कार की 36वीं वर्षगांठ मनाने के लिए इकट्ठा हुए, जो वर्ल्ड ह्यूमन राइट्स डे के ग्लोबल सेलिब्रेशन के साथ हुआ।