श्रद्धालुओं ने न केवल धर्मगुरु का आशीर्वाद लिया, बल्कि उनके शांतिपूर्ण विचारों को भी आत्मसात किया। दलाई लामा ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया में सच्ची खुशी केवल भीतर की शांति और मानसिक संतुलन से ही प्राप्त की जा सकती है। कार्यक्रम के दौरान वातावरण पूरी तरह शांत और अनुशासित बना रहा। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं के लिए यह पल किसी सपने के सच होने जैसा था। कई लोगों ने इसे अपने जीवन का सबसे यादगार अनुभव बताया। धर्मशाला में आयोजित यह मिलन न केवल व्यक्तिगत भक्ति का प्रतीक बना, बल्कि यहाँ से समूचे विश्व को आपसी सौहार्द और शांति का कड़ा संदेश भी दिया गया।