सरकारी विभागों में सोमवार को कर्मचारियों की उपस्थिति काफी कम रही। सरकार ने बड़े विभागों में तीस फीसदी कर्मचारियों को दफ्तर में बुला लिया था लेकिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट के पहिए थमने से कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ी हैं। विभागों में वही कर्मचारी उपस्थिति दर्ज करा सके, जिनके पास दफ्तर आने के साधन मौजूद थे। जो कर्मचारी सरकारी या निजी बसों में हर रोज अपने घरों से दफ्तरों तक पहुंचते रहे हैं, उनको बस सुविधा न मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ा। राज्य सचिवालय के भी कर्मचारियों को भी बसें न चलने के कारण परेशानी झेलनी पड़ी।
हिमाचल प्रदेश सचिवालय सेवाएं कर्मचारी संघ के अध्यक्ष संजीव शर्मा ने कहा कि सचिवालय में तीस फीसदी स्टाफ बुलाया गया था। सचिवालय में अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य है। तीस फीसदी स्टाफ तृतीय और चतुर्थश्रेणी वर्ग का है। इनको भी दफ्तर आना पड़ रहा है। इस तरीके से सचिवालय में 70 फीसदी स्टाफ उपस्थित रहता है। सरकार ने बसें आरंभ नहीं की हैं और जिनके पास अपने वाहन नहीं है, उनको दफ्तर आने में परेशानी हो रही है। सरकार को चाहिए कि वह दफ्तरों को खोलने के साथ ही बसों की बहाली भी करे।
जल शक्ति विभाग में भी कर्मचारियों की उपस्थित तीस फीसदी से कम रही। जिनके पास अपने आने जाने के साधन थे, वही दफ्तरों में उपस्थित हो सके। हिमाचल जल शक्ति विभाग अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष एलडी चौहान ने कहा कि आज विभागों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रही, क्योंकि बसें न चलने कारण कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। सरकार दफ्तरों को खोलने के साथ बसों की आवाजाही भी शुरु करे।