प्रदेश के निजी तकनीकी शिक्षण संस्थानों में आवंटित होने वाली छात्रवृत्ति राशि पर भी जांच शुरू हो गई है। प्रधान सचिव आरडी धीमान ने निदेशक तकनीकी शिक्षा को मामले की जांच का जिम्मा सौंपा है। शिक्षा विभाग की प्रारंभिक जांच में 150 करोड़ का घोटाला होने की आशंका है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब तकनीकी शिक्षा विभाग ने भी जांच करवाने का फैसला लिया है। शुक्रवार को प्रधान सचिव आरडी धीमान ने जांच के आदेश दिए।
तकनीकी शिक्षा विभाग की जांच शुरू होने पर प्रदेश में स्थित निजी इंजीनियरिंग, फार्मेसी और पॉलीटेक्निक कॉलेजों पर शिकंजा कसना तय है। प्रदेश के निजी तकनीकी शिक्षण संस्थानों में हजारों विद्यार्थी शिक्षा ले रहे हैं।
इन विद्यार्थियों को भी अनुसूचित जाति, जनजाति, मेधावी सहित कई अन्य योजनाओं के तहत छात्रवृत्तियां दी जाती हैं। शक है कि इन संस्थानों में भी छात्रवृत्ति आवंटन में घोटाला हुआ होगा।
शिक्षा विभाग की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कई निजी संस्थान शक के घेरे में आ गए हैं। 150 करोड़ का इन संस्थानों में घोटाला होने की आशंका है। इसी तर्ज पर तकनीकी संस्थानों में भी जांच होने पर बड़ा घोटाला सामने आने की संभावना है।