निजी क्लीनिकों से तीन गुना कम दरों पर मिल रही सुविधा अमर उजाला ब्यूरो शिमला। डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल शिमला में दांतों के इंप्लांट (प्रत्यारोपण) की सुविधा शुरू हो चुकी है। अस्पताल के रोगी कल्याण समिति की सितंबर में हुई बैठक में लिए फैसले के बाद शुरू की गई इस सुविधा के तहत अब तक दांतों के आठ इंप्लांट किए जा चुके हैं।
इसके अलावा 25 मरीजों ने इंप्लांट के लिए पंजीकरण करवाया है। इन्हें भी जल्द दांत लगाए जाएंगे। इस सुविधा की शुरुआत पेरियोडोंटिक्स विभाग ने कर दी है, जल्द दो अन्य विभागों प्रोस्थोडोंटिक्स और ओरल सर्जरी विभागों में भी इंप्लांट की सुविधा शुरू करने की तैयारी है। इसके शुरू होने से अब मरीजों को दांतों का इंप्लांट करने के लिए निजी क्लीनिकों में 30 से 35 हजार रुपये नहीं चुकाने पड़ेंगे। सरकारी डेंटल कॉलेज में इंप्लांट की सुविधा महज 6,200 से 6,750 रुपये में मिल जाएगी।
डेंटल कॉलेज शिमला के प्राचार्य डाॅ. आशु गुप्ता ने बताया कि आठ इंप्लांट किए जा चुके हैं। अब कैपिंग की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी। इसके लिए ढाई माह का गैप दिया जाता है। चार माह में दांतों के इंप्लांट और कैपिंग की प्रक्रिया पूरी की जाती है। उन्होंने बताया कि दांतों के इंप्लांट की प्रक्रिया में नकली दांत लगाया जाता है, इसे जबड़े में स्क्रू डालकर फिक्स किया जाता है। जबड़े में एक या एक से अधिक स्क्रू को लगाकर दांतों को लगाया जाता है। यह मरीज की मर्जी पर निर्भर करता है कि वह कितने इंप्लांट करवाना चाहता है। इंप्लांट किए दांत असल दांतों की तरह काम करते हैं। कैपिंग पर कितना खर्च करना है, यह मरीज पर निर्भर करता है। मरीजों को सस्ती दरों पर दांतों का महंगा उपचार मिलेगा। यह अस्पताल की एक उपलब्धि के साथ मरीजों के लिए बड़ी राहत है।