इस दौरान दोनों ही गांवों में सरकार की ओर से दिए गए प्लास्टिक के कूडे़दान से डेंगू का लारवा पाया गया। इसके अलावा धान के उखल (धान कूटने का स्थान) में भी पानी जमा था जिसमें डेंगू का लारवा मिला। टीमों ने गांवों से कुल 22 लोगों के सैंपल भी लिए। दोनों गांवों में 100 से ज्यादा परिवार हैं। 550 की आबादी वाले इस इलाके में तकरीबन हर परिवार से कोई न कोई सदस्य बीमार है। गांवों में दो आंगनबाड़ी केंद्र और एक हाई स्कूल भी है। ऐसे में डेंगू को लेकर लोगों में खासी दहशत हो गई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि हरोट और जरयालाहड़ गांवों में नेशनल मलेरिया रिसर्च इंस्टीट्यूट की दो टीमें भेजी थीं। टीम ने आठ लोगों में डेंगू की पुष्टि की है। पानी और प्रभावित लोगों के खून के सैंपल लिए गए हैं। सरकार की ओर से दिए गए प्लास्टिक कूड़ेदान से डेंगू मच्छर का लारवा मिला है। रविवार को प्रभावित गांवों में फॉगिंग की जाएगी। टीम में धर्मशाला अस्पताल के डॉ. आरके सूद, लंबागांव अस्पताल से डॉ. मनीष राणा, लैब तकनीशियन इंदु देवी, एएनएम रीना देवी, सुभाष चंद भी मौजूद रहे।