शिमला की ठंडी वादियों में डेंगू की दस्तक
शिमला। जिला शिमला में डेंगू के मामले आने से हड़कंप मचा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में अलर्ट जारी कर दिया है। जोनल अस्पताल के अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में इलाज करवाने आने वाले मरीजों के डेंगू के टेस्ट करने की सलाह स्वास्थ्य विभाग ने दी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी जिला शिमला डॉ. जितेंद्र चौहान ने इस बात की पुष्टि की है। वीरवार को चार नए मामलों के अलावा अब तक कुल पांच मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी है। इनमें चार शिमला तो एक सोलन का मरीज शामिल है।
हालांकि एकाएक मामले सामने आने के बाद से स्वास्थ्य महकमा दावा कर रहा है कि पोषण अभियान के तहत डेंगू की बीमारी से बचाव को लेकर विभाग लगातार जागरूकता अभियान भी चला रहा है। लेकिन बारिश के चलते पानी में इनके लारवे के अधिक होने के कारण अभी और शंका बनी हुई है। विभाग दावा कर रहा है कि पानी के खत्म होने की स्थिति में भी इनके लारवे एक साल तक उसी स्थान में जीवित रहते हैं। ऐसे में अब विभाग की ओर से घरों, अस्पतालों या फिर शिक्षण संस्थानों के पास पानी इकट्ठा होने पर छिड़काव के निर्देश जारी किए हैं। हालांकि अभी तक इन मामलों के सामने आने के बाद से जिला प्रशासन की ओर स्वास्थ्य विभाग के साथ बैठक कर मामले को लेकर आगामी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है।
ब्रेक बोन फीवर के नाम से मशहूर
डेंगू के बुखार ब्रेक बोन फीवर के नाम से मशहूर है। इस बीमारी में मरीज की हड्डियां तक जवाब दे जाती हैं। बुखार और सिरदर्द के अलावा शरीर पर दाने पड़ जाते हैं तथा मरीज को उल्टी आती है। इलाज में देरी बरतने पर मरीज की मौत तक हो सकती है। इस बीमारी का पता एनएस 1 सिरोलॉजी टेस्ट से चलता है। इस बीमारी के दौरान पानी की कमी को पूरा करने के लिए पपीता और नारियल पानी पीने की सलाह मरीजों को दी जाती है।
शिमला के मच्छरों में डेंगू फैलाने का दम नहीं
शिमला। जिले में भले डेंगू के पांच मामले अब तक आ चुके हों लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि शिमला जैसे ठंडे इलाकों में ऐसे मच्छर नहीं पनप सकते। हो सकता है कि बीमार हुए लोग बाहर किसी राज्य या प्रदेश के किसी गरम इलाके में गए हैं जहां वह इस बीमारी की जद में आए होंगे। सोलन, नाहन, सिरमौर, ऊना, मंडी और कांगड़ा में डेंगू के मामले अधिक आते हैं। यह इलाके गरम हैं, इस कारण यहां ऐसे मच्छरों के पनपने की संभावना अधिक रहती है। सीएमओ शिमला डॉ. जितेंद्र चौहान ने कहा कि शिमला जैसे ठंडे इलाकों में यह मच्छर नहीं हो सकते है। शिमला के मच्छरों में दम नहीं है कि वह डेंगू फैला सकें।