नोटबंदी के बाद भले ही बुजुर्गों को बैंकों ने राहत दी, लेकिन शनिवार को कम ही सीनियर सिटीजन कतारों में दिखे। बैंकों में बनाए विशेष काउंटर खाली ही दिखे। दोपहर बाद कुछ देर के लिए भीड़ रही, लेकिन अधिक बुजुर्गों ने बैंकों का रुख किया ही नहीं। ऐसे में बैंक में जो भी आया, उसका कैश एक्सचेंज कर दिया गया।
हालांकि, एटीएम के बाहर अभी भी लाइनें लग रही हैं। शहरों में तो कुछ हालात सामान्य हुए हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इक्का-दुक्का एटीएम में पैसे निकलने से अभी भी कतारें लग रही हैं। स्टेट बैंक की आनी और कुंगश शाखा पहुंचे दूरदराज क्षेत्र के ग्रामीण नोलराम
(70), जूरीराम (65), साधू सिंह कायथ (70) का कहना है कि कुछ दिन की दिक्कत तो जरूर है, लेकिन मोदी सरकार का फैसला सराहनीय है। चंबा निवासी रोशन सिंह ने कहा कि मोदी सरकार का क्रांतिकारी कदम है। कुछ दिन बाद हालात सामान्य हो जाएंगे। देश दोबारा से आर्थिक क्रांति के पथ पर लौट आएगा।
कतार में लगे बुजुर्गों को पिलाई चाय
पुराने नोट बदलने की होड़ में सभी बैंकों में लंबी-लंबी कतारें लगना अब आम बात हो गई है। शनिवार बैंकों की ओर से केवल सीनियर सिटीजन के लिए ही पुराने नोट बदलने के दिन सुबह से ही वृद्ध बैंकों के बाहर उमड़ना शुरू हो गए थे।
दोपहर तक बैंकों में लंबी लंबी कतारें लगी रहीं। क्षेत्र के समाजसेवी कृष्ण चंद, गिरधारी लाल, जगदीश राम आदि ने बैंकों की लंबी लाइनों में खड़े वृद्धों और महिलाओं के लिए चाय का प्रबंध किया।