काले धन पर लगाम लगाने और नकली करेंसी को खत्म करने के लिए की गई नोटबंदी के बाद अभी तक एक भी नकली नोट नहीं पकड़ा गया है। इसके पीछे पैसे जमा कराने के लिए उमड़ रही भीड़ और पुरानी तकनीक को बड़ी वजह माना जा रहा है। 500-1000 के पुराने नोट बंद होने के बाद से अब तक विभिन्न बैंकों में अरबों रुपये के पुराने नोट जमा हो चुके हैं।
सभी शाखाओं को एलईडी लैंप या सार्टिंग मशीन से नोटों की चेकिंग के बाद जमा करने की बात कही गई थी लेकिन नोटबंदी के 10वें दिन तक पूरे हिमाचल में एक भी नकली नोट का मामला सामने नहीं आया है। हैरानी की बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 8 नवंबर को नोटबंदी के एलान के समय खुद नकली नोट को इस फैसले का एक कारण बताया था। लेकिन अब तक नकली नोट का एक भी मामला सामने न आने से अब सवाल उठने लगे हैं कि कहीं बैंकों में बिना असली-नकली नोट की पड़ताल किए ही पुराने नोट जमा तो नहीं किए जा रहे।
ग्राहकों को लौटाए जा रहे नकली नोट: बैंक अधिकारी
एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी ने बताया कि नकली नोट के मामले शाखाओं में सामने तो आ रहे हैं लेकिन बैंक अधिकारी अपने स्तर पर नोट नकली होने की आशंका पर उसे ग्राहक को लौटा रहे हैं। कानूनी प्रक्रिया में फंसने से बचने के लिए ऐसा किया जा रहा है। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि बैंक में इस समय सिर्फ 500-1000 के ही नोट बदलने या जमा करने वाले ही आ रहे हैं। ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि नकली नोट करेंसी चेस्ट तक नहीं पहुंच रहे।