फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीएम वीरभद्र के खिलाफ खंडपीठ का सुनवाई से इनकार

विज्ञापन
विज्ञापन
दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। खंडपीठ ने याचिका सुनवाई के लिए दूसरी खंडपीठ के समक्ष स्थानांतरित कर दी है।
विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी एवं न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ की खंडपीठ ने हाल ही में याचिकाकर्ता कॉमन काज को इस मामले से अलग करते हुए अदालत की सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन व सिद्धार्थ अग्रवाल को न्याय मित्र नियुक्त कर दिया था।

अदालत ने उन्हें यह तय करने का निर्देश दिया है कि यह याचिका जनहित में है या नहीं। खंडपीठ में अब न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ की जगह न्यायमूर्ति जयंतनाथ शामिल हुए हैं। उन्होंने मामले की सुनवाई में असमर्थता जता दी। खंडपीठ ने याचिका की सुनवाई दूसरी खंडपीठ के समक्ष 6 अगस्त को तय कर दी।
विज्ञापन
विज्ञापन

दिल्ली हाईकोर्ट के सीजे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में थी याचिका

पेश मामले में कॉमन कॉज ने अधिवक्ता प्रशांत भूषण के माध्यम से नवंबर 2013 में एक याचिका दायर की थी। इसमें सीबीआई को वीरभद्र सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच करने के निर्देश देने की मांग की गई थी। आरोप लगाया गया था कि जब वह केंद्र में इस्पात मंत्री थे तो उस समय भ्रष्टाचार में लिप्त रहे थे।

जनवरी 2014 में वकील प्रशांत भूषण ने एक और अर्जी दायर कर आरोप लगाया था कि वीरभद्र ने बतौर मुख्यमंत्री भी रिश्वत ली। वहीं, मुख्यमंत्री वीरभद्र की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रशांत भूषण पर बदनीयती व राजनीतिक कारणों से यह जनहित याचिका दायर करने का आरोप लगाया था।

उन्होंने तर्क रखा था कि भूषण आप पार्टी से जुड़े थे और उनका राजनीतिक मकसद है। इसके अलावा उन्होंने कांगड़ा जिले में भूषण की कुमुद भूषण एजुकेशन सोसायटी के दस्तावेज भी पेश किए। वीरभद्र ने सोसायटी के भूमि आवंटन संबंधी प्रस्ताव को 12 नवंबर 2006 में मंजूरी नहीं दी थी। स्पष्ट है कि याचिका बदनीयती पूर्ण तरीके से दायर की गई है अत: इसे खारिज किया जाए।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें