न दिल्ली के सीएम दफ्तर की चकाचौंध, न सुरक्षा कर्मियों का घेरा, न बार-बार मोबाइल की घंटी, न दिन भर मिलने वाले लोगों का मेला, फेसबुक और ट्विटर पर कोई पोस्ट नहीं और पूरी तरह मौन, जी हां.... 12 अगस्त तक यानी पूरे 10 दिन तक कुछ ऐसी ही
फकीरों वाली जिंदगी जीएंगे दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल। सोमवार को अरविंद केजरीवाल धर्मशाला स्थित प्रख्यात विपश्यना केंद्र धर्मकोट में 10 दिन तक मेडिटेशन के लिए पहुंचे। वह यहां आत्मिक शांति पाने के लिए ध्यान लगाने आए हैं।
10 दिन तक पूरी तरह मौन व्रत
वह विपश्यना केंद्र में मुख्यमंत्री की तरह नहीं, बल्कि साधु की तरह 10 दिन बिताएंगे। विपश्यना केंद्र की दिनचर्या और नियमावली के अनुसार सुबह 5 बजे उठना होगा। सोने का समय रात 11 बजे होगा। इसके बाद दिन में कई सत्रों में वह ध्यान लगाएंगे। कुछेक सत्रों में धर्म को लेकर लेक्चर भी होंगे।
केजरीवाल केंद्र में किसी से भी सीधे आंख नहीं मिला सकेंगे। 10 दिन तक पूरी तरह मौन व्रत रखना होगा। उनसे परिवार सहित कोई भी बाहरी व्यक्ति नहीं मिल पाएगा। वह अपने मोबाइल, लैपटॉप आदि का प्रयोग नहीं कर पाएंगे। केंद्र में पतंजलि के प्रोडक्ट होंगे।
सोने को एक कंबल-चादर, रात को नहीं मिलेगा खाना
केंद्र में केजरीवाल को पीतल के बर्तनों में खाना मिलेगा। सोने के लिए एक कमरा होगा। इसमें एक बैरक बनी होगी, जहां अरविंद सोएंगे। सोने के लिए उन्हें सिर्फ एक कंबल और चादर मिलेगी। दिन में सिर्फ दो समय खाना मिलेगा। सुबह नाश्ते में दूध, केला और दलिया मिलेगा। रात का भोजन नहीं मिलेगा।
यह होता है विपश्यना का लाभ
विपश्यना केंद्र के इंचार्ज पवन शर्मा ने बताया कि विपश्यना केंद्र में पहले चार दिन तक व्यक्ति को शेष दुनिया से कटने में लग जाते हैं। उसके बाद व्यक्ति की आंतरिक शक्तियों को जागृत किया जाता है। इससे आत्मिक शांति मिलती है। इस दौरान व्यक्ति अपनी कमियां और खूबियां तलाशता है। मौन व्रत से गुस्से पर नियंत्रण पाया जाता है। विपश्यना 10 दिन का मुफ्त कोर्स होता है।