बरोट-टिक्कन में भी देव पशाकोट का एक सुंदर मंदिर है और घने देवदार वृक्षों के नीचे लकड़ी का बना हुआ है। दूर-दूर से लोग कामनाओं की पूर्ति के लिए यहां नतमस्तक होते हैं।
देवता शिवरात्रि में राजाओं के समय से शिरकत करने आते हैं और पैदल अपने देवलुओं के साथ मंडी शिवरात्रि महोत्सव में पहुंचते हैं। देवता अपने कारदारों के साथ रास्ते में ही रात्रि विश्राम करते हैं।
जोगिंद्रनगर मेला इनके पहुंचने से ही शुरू होता है और मंडी शिवरात्रि की जलेब में अहम स्थान रहता है। देवता के पुजारी कृष्ण चंद, गूर नरोत्तम राम, प्रेम सिंह, दुमंच डागू राम, नरेश कुमार और अच्छर सिंह ने बताया कि देवता रविवार सुबह नौ बजे अपने मंदिर से बाहर निकल गए हैं।
देवता के रात्रि विश्राम वरधान, झंटिगरी, गवाहन, उरला, मसवाहण, डलाह, माणा, टांडू में और 4 मार्च को मंडी में पुरानी मंडी से अपने चौहारघाटी के 9 देवताओं के साथ माधव राय मंदिर में हाजिरी भरेंगे।