हिमाचल के जनजातीय जिला किन्नौर में सेब की पैदावार लगातार घटती जा रही है। पिछले कुछ साल के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो हर साल सेब की पैदावार में कमी आई है। मौसम में आई तबदीली इसका कारण माना जा रहा है।
कभी समय से पूर्व मूसलाधार बारिश तो कभी बर्फबारी न होना भी सेब की पैदावार घटने का कारण है। भूस्खलन से लगातार जमीन धंसना और बिजली प्रोजेक्टों के अंधाधुंध निर्माण से भी सेब की फसल पर विपरीत असर पड़ रहा है। इस कारण जिले के बागवानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उद्यान विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार 1994-95 में जिले में 8 लाख 17 हजार 285 पेटियां, 1995-96 में 9 लाख 10 हजार 950, वर्ष 1996-97 में 8 लाख 95 हजार 50, 1997-98 में 15 लाख 3 हजार, 592, वर्ष 1998-99 में 11 लाख 87 हजार 209, 1999-2000 में 10 लाख 96 हजार 662, वर्ष 2001 में 8 लाख 96 हजार 539, वर्ष 2002 में 9 लाख 14 हजार 955,
वर्ष 2003 12 लाख 40 हजार 944, वर्ष 2004 में 16 लाख 29 हजार 244, वर्ष 2005 में 16 लाख 64 हजार, 164, वर्ष 2006 में 18 लाख 13 हजार 731, वर्ष 2007 18 लाख 32 हजार 576, वर्ष 2008 19 लाख 43 हजार, 376, वर्ष 2009 में 24 लाख 82 हजार, 550, वर्ष 2010 में 18 लाख 21 हजार 639, वर्ष 2011 में 28 लाख 70 हजार 141,
वर्ष 2012 में 23 लाख 94 हजार, 799, वर्ष 2013 में 23 लाख 38 हजार 927, वर्ष 2014 में 24 लाख 36 हजार 976, वर्ष 2014 में 24 लाख 36 हजार 976, वर्ष 2015 में 26 लाख 63 हजार 833, वर्ष 2016 में 37 लाख 49 हजार 391 और वर्ष 2017 में 30 लाख 3 हजार 925 पेटियों देश की विभिन्न मंडियों में पहुंच चुकी हैं।
उद्यान विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017-18 में सेब पैदावार 26 लाख 16 हजार 896 पेटियों तक सिमटने के आसार हैं। अब तक जिले के निचार खंड से 11 हजार 696 सेब पेटियां, कल्पा से 868 पेटियां, पूह खंड से 25 पेटियां विभिन्न मंडियों में भेजी गई हैं।
उधर, बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ. हेम चंद शर्मा ने कहा कि बीते वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष साढ़े चार लाख सेब की पेटियां मंडियों में कम पहुंचने की संभावना है। इस वर्ष फ्लावरिंग के दौरान अधिक बारिश होने से तापमान सही नहीं रहा। इसके चलते नकदी फसल सेब की पेटियां घट सकती हैं।
विश्व में है किन्नौरी सेब की मांग
किन्नौर के सेब की मांग देश के अलावा विदेशों में भी अधिक है। यह सेब लंबी अवधि तक सुरक्षित रहता है, जबकि राज्य के अन्य क्षेत्रों के अलावा किन्नौर के सेब में अधिक रस, मिठास और कलर बराबर रहता है।