जलवायु परिवर्तन को लेकर मैक्लोडगंज में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘डायलॉग फॉर अवर फ्यूचर: अ कॉल टू क्लाइमेट एक्शन’ रविवार को संपन्न हो गया। जलवायु विज्ञान के क्षेत्र ख्याति प्राप्त लेखक किम स्टेनली रोबिन्सन ने जलवायु परिवर्तन पर दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आए पर्यावरण कार्यकर्ताओं और वैज्ञानिकों के साथ गहन चर्चा की।
किसी भी तकनीकी की सफलता की कहानी एक देश या कंपनी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। वैसे ही ग्लोबल वॉर्मिंग पर छिड़े विमर्शों को कुछेक बड़े विश्वविद्यालयों के भरोसे छोड़ने के बजाय अब हर जन से रायशुमारी आवश्यक है। हमें आमजन में व्याप्त ज्ञान के उस विशाल भंडार के प्रति सम्मान की भावना जतानी होगी। तिब्बत पॉलिसी इंस्टीट्यूट की पदाधिकारी दिचिन पाल्मू ने यह बात जलवायु परिवर्तन को लेकर मैक्लोडगंज में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कही।
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उन्होंने कहा कि ग्लोबल वॉर्मिंग एक वैश्विक समस्या है। आध्यात्मिक गुरु दलाईलामा के विचार पर अमल करते हुए अब इससे निपटने के लिए वैश्विक समुदाय को एक होकर प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि आज की सिस्टमेटिक समस्याओं के सिस्टमेटिक हल ढूंढने के प्रयास करने की आवश्यकता है। आज छोटी व बड़ी समस्याओं, स्थानीय व वैश्विक समस्याओं और समस्याओं की अन्य विविधताओं को देखते हुए अब सामूहिक प्रयास करने होंगे।
जलवायु परिवर्तन को लेकर मैक्लोडगंज में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘डायलॉग फॉर अवर फ्यूचर: अ कॉल टू क्लाइमेट एक्शन’ रविवार को संपन्न हो गया। जलवायु विज्ञान के क्षेत्र ख्याति प्राप्त लेखक किम स्टेनली रोबिन्सन ने जलवायु परिवर्तन पर दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आए पर्यावरण कार्यकर्ताओं और वैज्ञानिकों के साथ गहन चर्चा की। इस दौरान भाग ले रहे पर्यावरण कार्यकर्ताओं और वैज्ञानिकों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग को लेकर कॉन्फ्रेंस में जो विमर्श शुरू हुआ है, आने वाले वर्षों में यह कई सकारात्मक परिणाम देता रहेगा।