ज्ञान विज्ञान समिति के संवाद कार्यक्रम में वक्ताओं ने की मलबा प्रबंधन, बेहतर जल निकासी की वकालत
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बोले, बेहतर नीति न होने पर बढ़ रहीं प्राकृतिक आपदाएं संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल में प्राकृतिक आपदाएं अब सामान्य घटनाएं नहीं रही हैं बल्कि राज्य की विकास नीतियों और पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। निर्माण कार्यों से निकल रहा मलबा नदियों में फेंका जा रहा है जिस कारण बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं।
यह बात हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति की ओर से शनिवार को वाईडब्लूसीए शिमला में आयोजित संवाद कार्यक्रम में वक्ताओं ने कही। संवाद में विशेषज्ञ नागरिकों ने जलवायु संकट और मलबा प्रबंधन तथा नीति विफलताओं पर गहन चर्चा की। हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति के राज्य अध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश भूरेटा और राज्य सचिव सत्यवान पुंडीर ने बताया कि आपदाएं प्राकृतिक नहीं हैं बल्कि यह नीति और नजरिये की देन हैं। जल शक्ति विभाग से सेवानिवृत्त जोगिंद्र चौहान और लोक निर्माण विभाग से बीएस चौहान ने मलबे को उचित तरीके से न फेंकने पर चर्चा की।
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उन्होंने कहा कि सड़कों, सुरंगों और निर्माण कार्यों से निकले मलबे को अनियंत्रित रूप से नदी-नालों में फेंका जा रहा है। इससे जलमार्ग अवरुद्ध हो रहे हैं और बाढ़ तथा भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं। वहीं यह भी बताया कि शहरों और कस्बों में नालियों की सफाई और जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। नतीजतन मामूली बारिश भी जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर रही है।
संवाद में वक्ताओं ने बताया कि 21 सितंबर को वृहद जन संवाद आयोजित किया जाएगा। इसकी एक जन रिपोर्ट तैयार की जाएगी। एक और दो नवंबर को प्रस्तावित राज्य स्तरीय सम्मेलन में इसे पेश किया जाएगा। इस अवसर पर नवीन, महेश्वर सिंह, तनुजा कुमारी, आरके गुप्ता, वीवीएस डोगरा, रविंद्र शर्मा, मनमोहन वर्मा, डॉ. आरसी वर्मा, डॉ. एसएस चंदेल, आरएस चौहान, विद्या चौहान, डॉ. रवि कुमार, केबी सिंह समेत अन्य लोग मौजूद रहे।