हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू की दलाश पंचायत के सोईधार गांव में जलशक्ति विभाग के पेयजल भंडारण टैंक में मरे हुए कई जंगली जानवर मिले हैं। ग्रामीणों ने स्वयं टैंक की सफाई की तो जंगली जानवरों के कंकाल और गाद निकली। इससे जल जनित रोगों के फैलने की आशंका बन गई है। हद तो इस बात की है कि विभाग पेयजल स्टोरेज टैंक पर छत तक नहीं लगा पाया है।
खुले टैंक में ही पानी स्टोर किया जा रहा है। ग्रामीण लंबे समय से इसी टैंक का दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। टैंक पर लेंटर न होने से इसमें जीव-जंतु और कचरा समा रहा है। विभाग लोगों को मटमैला और गंदगी भरा पेयजल आपूर्ति मुहैया करवा रहा है। इस टैंक से सोईधार, शिलाबाग, गौंडाधार, दनारा और वोआ आदि गांवों के लिए पेयजल सप्लाई होती है।
ग्रामीण राजेंद्र कुमार, यशवंत, सीता राम, विमला देवी, रजनी देवी, सुनीता देवी, गिरधारी लाल, मनोहर लाल, सतपाल, राजकुमार, विनोद, मनमोहन, अंकुश और निखिल ने कहा कि जब लोगों ने टैंक की सफाई की तो उसमें से जीव से लेकर अधिक मात्रा में गंदगी निकली। उन्हें लंबे से फिटर भी उपलब्ध नहीं है। इस कारण स्वयं पानी की आपूर्ति सुचारु रूप से चलानी पड़ती है।
सोईधार गांव के लिए पानी की मेन सप्लाई को भी जगह-जगह से पंचर किया गया है। उधर, जलशक्ति विभाग आनी के एक्सईएन राजकुमार कौंडल ने कहा कि एसडीओ और जेई को निर्देश दिए गए हैं कि टैंकों की समय-समय पर सफाई की जाए। जहां तक सोईधार के टैंक की बात है। इस विषय में एसडीओ और जेई दलाश सबडिवीजन से रिपोर्ट तलब की जाएगी।