सूखे की संभावित स्थिति से निपटने के लिए सभी जिला उपायुक्तों और विभागाध्यक्षों को ठोस कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं। बावड़ियों की सफाई करने को कहा गया है ताकि पानी का संकट न हो। पशु चारे की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
हिमाचल प्रदेश में जनवरी और फरवरी में सामान्य से 36 फीसदी कम बारिश होने से सूखे जैसे हालात बन गए हैं। अगर मार्च और अप्रैल में भी बारिश कम हुई तो कृषि-बागवानी और पेयजल परियोजनाओं पर मार पड़ेगी। सूखे की संभावित स्थिति से निपटने के लिए सभी जिला उपायुक्तों और विभागाध्यक्षों को ठोस कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं। बावड़ियों की सफाई करने को कहा गया है ताकि पानी का संकट न हो। पशु चारे की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सूखे की संभावित स्थिति से निपटने की तैयारी के लिए सोमवार को मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई।
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राज्य सचिवालय में सभी विभागों के सचिवों, निदेशकों और उपायुक्तों के साथ मंथन किया गया। इस बैठक में आपदा प्रबंधन विभाग के साथ सही तालमेल बैठाने के निर्देश दिए गए हैं। सभी उपायुक्तों को जिला स्तर पर कमेटी गठित कर समीक्षा करने के लिए भी कहा गया है। जल शक्ति विभाग के अधिकारियों को पेयजल योजनाएं सुचारू चलाने को कहा गया है। बैठक में प्रधान सचिव राजस्व एवं वन, सचिव जलशक्ति एवं बागवानी, सचिव कृषि एवं पशुपालन और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उपायुक्त बैठक में वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
वनों को आग से बचाने के लिए तैयार रखें टास्क फोर्स
बैठक में वनों को आग से बचाने के लिए भी योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। टास्क फोर्स तैयार रखने को कहा गया है ताकि वन संपदा को आग की भेंट चढ़ने से बचाया जा सके। बैठक में जल शक्ति विभाग के अधिकारियों ने कहा कि जनवरी और फरवरी में हमीरपुर के छह क्षेत्रों में पेयजल परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं
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फरवरी में सामान्य से 69 फीसदी कम बरसे बादल
प्रदेश में फरवरी के दौरान सामान्य से 69 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। इस अवधि में 96.4 मिलीमीटर बारिश काे सामान्य माना गया है। इस दौरान फरवरी में 29.7 मिलीमीटर बारिश ही हुई। कहां कितनी सामान्य से कम बारिश (फीसदी में)