तपोवन में अब रैली पर सियासत गर्मा गई है। दो दिसंबर को प्रस्तावित भाजपा की रैली की इजाजत जिला प्रशासन ने अचानक वापस ले ली। ये रैली विधानसभा परिसर के नजदीक जोरावर स्टेडियम में होनी थी। प्रशासन ने अब भाजपा को दाड़ी में रैली करने के लिए कहा है। इससे भाजपा भड़क गई है। प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने मंगलवार को कहा कि रैली तो वहीं होगी। विधानसभा के बाहर अब दोनों दल सीधे टकराव के मूड में हैं।
प्रशासन का फैसला आने के बाद नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने प्रेस वार्ता बुलाई। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने भाजपा को जोरावर स्टेडियम में दो दिसंबर को रैली करने की अनुमति दी है। यह इजाजत प्रशासन ने तीन दिन पहले दी थी। अब अचानक रैली स्थल की अनुमति रद्द करने का फैसला हैरान करने वाला है।
सरकार भाजपा की रैली के बाद के असर से घबरा गई और इजाजत वापस ले ली। धूमल ने कहा कि जब से तपोवन में विधानसभा शुरू हुई है तब से जोरावर स्टेडियम में कर्मचारी संघ, राजनीतिक पार्टियां और कई अन्य संगठन रैलियां करते आए हैं। आज सरकार ने विचित्र निर्णय ले लिया।
प्रशासन के निर्णय के बाद पार्टी ने भी फैसला लिया है कि भाजपा रैली जोरावर स्टेडियम में ही करेगी। सरकार की जोर जबरदस्ती हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। भाजपा शांतिपूर्वक ढंग से रैली करेगी। धूमल ने आरोप लगाया कि रविवार शाम को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में भाजपा की रैली का स्थल रद्द करने का फैसला लिया गया।
साथ ही कांग्रेस ने भी काउंटर रैली करने का फैसला लिया। कांग्रेस दो दिसंबर को भाजपा को रैली करने दे और तीन दिसंबर को खुद रैली करे। कांग्रेस की रैली फ्लॉप होगी। सरकार ने भाजपा की रैली का स्थल रद्द कर तानाशाही रवैया अपनाया है। विपक्ष इस मामले को मंगलवार को सदन में भी उठाएगा। इस तानाशाही निर्णय का सदन के अंदर और बाहर दोनों जगह विरोध किया जाएगा।
उधर, प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि जोरावर स्टेडियम विधानसभा परिसर के नजदीक है। भाजपा की रैली में माइक आदि का प्रयोग करने पर विधानसभा की कार्यवाही में विघ्न पड़ सकता था। इसलिए विधानसभा परिसर को शोर-शराबे से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने रैली का स्थान बदलकर दाड़ी किया। हमने भाजपा की रैली स्थल की अनुमति रद्द नहीं की, इसे जिला प्रशासन ने किया है।
कांगड़ा के उपायुक्त रितेश चौहान ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ने जोरावर स्टेडियम में अपनी-अपनी रैलियां आयोजित करने के लिए अनुमति मांगी थी। इस दौरान लॉ एंड आर्डर की स्थिति कहीं खराब न हो, इसलिए रैली करने के लिए जोरावर स्टेडियम के बजाय दाड़ी मैदान की अनुमति दी गई।