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झोटों की लड़ाई मामला: हाईकोर्ट में डीसी, एसपी ने रखे अजीब तर्क

Thu, 12 Oct 2017 12:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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राजधानी शिमला के नजदीक मशोबरा में झोटों की लड़ाई के मामले में डीसी और एसपी शिमला ने कोर्ट में अजीब तथ्य रखे हैं। दोनों ने हाईकोर्ट में शपथपत्र के माध्यम से बताया है कि पुलिसकर्मियों के सामने झोटों की लड़ाई हुई ही नहीं। 
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एसपी सौम्या सांबशिवन ने अपने जवाब में कोर्ट को बताया कि मेले में भारी संख्या में जनता को देखते हुए पर्याप्त पुलिस व्यवस्था मुहैया कराई गई थी। जब पुलिस कर्मी ट्रैफिक व्यवस्था देखने के लिए मौके से हटे तो पुलिस को बताया गया कि मेले में झोटों की लड़ाई करवा दी गई। 

पुलिस के संज्ञान में मामला आते ही मंदिर कमेटी और मेला आयोजकों के खिलाफ  भारतीय दंड संहिता तथा पशु क्रूरता निरोधक कानून में प्राथमिकी दर्ज की गई। 

एसपी ने कसुम्पटी निवासी सुनील मोहन जेटली की ओर से कोर्ट को लिखे पत्र पर संज्ञान लेने वाली याचिका को खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि इसमें कोई दम नहीं है। एसपी का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज करने के बाद इस मामले की जांच की जा रही है। 
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उधर, उपायुक्त रोहन चंद ठाकुर ने अपने शपथ पत्र के माध्यम से पुलिस की कही बातों को ही उजागर किया। उपायुक्त शिमला का कहना है कि 25 सितंबर को इस मामले की न्यायिक जांच एडीएम शिमला को सौंपी गई है और निर्धारित समय में रिपोर्ट मांगी गई है।

हाईकोर्ट ने दो नवंबर को दोनों अधिकारी कोर्ट में बुलाए

प्रदेश हाईकोर्ट ने मशोबरा के सायर मेले में मेला कमेटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और कायदे कानूनों को ताक पर रखकर झोटों की लड़ाई करवाने के मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए डीसी और एसपी शिमला को दो नवंबर को कोर्ट में उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने 20 सितंबर को इस मामले में मुख्य सचिव सहित डीसी, एसपी, एसडीएम शहरी और सायर मेला कमेटी के प्रधान को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब तलब किया था।
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इस दिन मशोबरा में हुई झोटों की लड़ाई

16 सितंबर को मशोबरा से करीब दो किमी दूर तलाई स्थित माता भद्रकाली के प्रांगण में झोटे लड़वाए गए। सुप्रीम कोर्ट के पशु क्रूरता रोकने को जारी आदेशों के बाद इस मेले में तीन साल से झोटों की लड़ाई बंद थी।

प्रार्थी ने कसुम्पटी के विधायक अनिरुद्ध सिंह को ऐसे गैरकानूनी कार्यक्रम में भाग लेने, सायर मेला कमेटी के सभी पदाधिकारियों को झोटों की लड़ाई का आयोजन करने, भगाली के बलदेव, घनाहट्टी के अमर सिंह, दहली से परस राम, शालाघाट से मस्त राम, नीन से देवी राम और अन्य वे लोग जो मेले में अपने अपने झोटे लाए थे।

उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा पुलिसवालों और सरकारी अधिकारी जो मौके पर मूकदर्शक बने रहे, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। प्रार्थी ने सबूत के तौर पर समाचार पत्रों में छपी खबरों की कटिंग तथा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की प्रति भी कोर्ट के ध्यानार्थ अपने पत्र के साथ लगाई है। 
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