खेल विभाग के अधिकारी इस नॉन शेड्यूल गेम के लिए सरकारी कोष से पैसा जारी कर नहीं सकते हैं। प्रतियोगिता के लिए साढ़े तीन करोड़ का बजट प्रस्तावित है। इस भारी भरकम राशि का इंतजाम किस प्रकार किया जाए। इसको लेकर अफसरशाही पसोपेश में है।
विभागीय अधिकारियों ने इस समस्या से निकलने के लिए अब उद्योग विभाग, पर्यटन विभाग और राज्य बिजली बोर्ड से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। खेल विभाग की अपील ने दूसरे विभागों के अफसरों को भी मुश्किल में डाल दिया है।
नॉन शेड्यूल गेम के लिए दूसरे विभाग किस मद से पैसा जारी करें, इसको लेकर बैठकों का लगातार दौर जारी है। लेकिन कोई भी निष्कर्ष नहीं निकल रहा है। ऐसे में 15 अप्रैल के बाद प्रतियोगिता के आयोजन पर संशय हो गया है।
प्रदेश में शेड्यूल खेलों को तीन श्रेणियों ए, बी और सी में बांटा गया है। इन श्रेणियों के हिसाब से ही विभाग पैसा जारी करता है। शेड्यूल खेलों का ही ब्लाक, जिला और राज्य स्तर पर आयोजन होता है। शेड्यूल खेलों की सूची में शामिल नहीं किए गए खेलों के लिए विभाग सरकारी पैसा जारी नहीं कर सकता है।
ग्रेट खली से हो चुकी हैं कई दौर की बैठकें
प्रतियोगिता का आयोजन करने के लिए खेल मंत्री गोविंद ठाकुर से लेकर विभागीय अधिकारियों की ग्रेट खली से कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। शिमला से लेकर चंडीगढ़ तक आयोजित हुई इन बैठकों में मंडी और सोलन में प्रतियोगिता करवाने का फैसला हुआ है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी अपने जालंधर दौरे के दौरान ग्रेट खली की अकादमी का दौरा कर चुके हैं।
तीन से सात हजार रुपये की टिकट बेचने का प्रस्ताव
रेसलिंग प्रतियोगिता देखने के लिए आने वाले लोगों के लिए टिकटों का दाम तीन हजार, पांच हजार और सात हजार रुपये तय किया है।