धर्मगुरु दलाईलामा के सबसे बड़े शिष्य लामा लोचर रिंपोंछे नहीं रहे। ग्यूतो (तांत्रिक) मठ सिद्धबाड़ी में सोमवार को सबसे वरिष्ठ लामा लोचर रिंपोंछे का दाह संस्कार कर दिया गया। 87 वर्षीय लामा लोचर रिंपोंछे ने 23 अक्तूबर को अंतिम सांस ली।
इसके बाद वह मृत्यु समाधि पर चले गए। 11 दिन बाद लोचर रिंपोंछे मृत्यु समाधि से उठ गए। इसके बाद सोमवार को ग्यूतो (तांत्रिक) मठ सिद्धबाड़ी में वरिष्ठ लामाओं और बौद्ध भिक्षुओं ने विधिवत पूर्जा अर्चना के साथ उनका दाह संस्कार कर दिया।
अब करीब दो तीन वर्ष बाद धर्मगुरु दलाईलामा लामा लोचर रिंपोंछे के पुर्नअवतार का निर्णय लेंगे। लामा लोचर रिंपोंछे मैकलोडगंज में धर्मगुरु दलाईलामा के निवास स्थान के पास ही रहते थे। कर्नाटक में उनका अपना मठ भी था।
तिब्बत के सबसे वरिष्ठ लामा थे
वह अधिकतर समय मेडिटेशन और टीचिंग में व्यस्त रहते थे। 1959 से पहले तिब्बत में उन्होंने बौद्ध धर्म की सबसे बड़ी डिग्री गिशी (डाक्टर ऑफ फिलासिफी) हासिल की थी।
ग्यूतो (तांत्रिक) मठ सिद्धबाड़ी के दूसरे मुख्य प्रभारी थुपतेनतेनजिम ने बताया कि लोचर रिंपोंछे तिब्बत के सबसे वरिष्ठ लामा थे। वह धर्मगुरु दलाईलामा के सबसे करीबी शिष्य थे। अधिकतर समय वह दलाईलामा के पास रहते थे।
उनका देहांत 23 अक्तूबर को हुआ था। इसके बाद वह मृत्यु समाधि में चले गए थे। 3 नवंबर को वह मृत्यु समाधि से उठ गए। इसके बाद वरिष्ठ लामाओं और बौद्ध भिक्षुओं ने विधिवत पूर्जा अर्चना के साथ उनका दाह संस्कार सोमवार को कर दिया।
जल्द पुर्नअवतार की कामना
निर्वासित तिब्बत सरकार के पूर्व प्रधानमंत्री सामदोंग रिंपोंछे ने लामा लोचर रिंपोंछे के देहांत पर शोक व्यक्त किया है। बनारस से फोन पर सामदोंग रिंपोंछे ने कहा कि उम्र और ज्ञान में लोचर रिंपोंछे सबसे में वरिष्ठ थे।
उन्होंने कहा कि लोचर रिंपोंछे धर्मगुरु दलाईलामा के सबसे बड़े शिष्य थे। वह दलाईलामा के सबसे करीबियों में माने जाते थे। उन्होंने कहा कि लामा लोचर रिंपोंछे के पुर्नअवतार का निर्णय दो तीन साल बाद धर्मगुरु दलाईलामा ही लेंगे।
उन्होंने लोचर रिंपोंछे के शिष्यों को सांत्वना दी। उन्होंने कामना की कि लोचर रिंपोंछे का पुर्नअवतार जल्द हो जिससे बौद्ध धर्म का सेवा की जा सके।