14वें तिब्बती धर्मगुरु एवं नोबेल शांति पुरस्कार विजेता दलाईलामा ने कहा कि आज आर्थिक विकास में विश्व आगे बढ़ा है। हर देश एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। मानवता को लेकर हर व्यक्ति एक दूसरे के सहयोग को आगे आया है। लेकिन, अफसोस की बात यह है कि कुछ लोगों में समाज में रह कर भी मानवता के प्रति सोच में बदलाव नहीं आया है। वे लोग दुनिया में रह कर भी दुनिया से जुड़े नहीं हैं। उनकी सोच में भी समय के साथ बदलाव आना चाहिए।
इन लोगों की सोच में मानवता के प्रति बदलाव जरूरी है। धर्मगुरु ग्लकोमा सोसायटी ऑफ इंडिया की आईएचबीटी पालमपुर में आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अब तक 200 बिलियन लोग युद्धों में मारे जा चुके हैं। चाहे वह प्रथम विश्व युद्ध हो या दूसरा विश्वयुद्ध हो या अन्य युद्ध। उस समय लोगों में मानवता के खिलाफ जीत का नशा था। लोगों की यह सोच अब मानवता के आगे हार जानी चाहिए।