धर्मगुरु दलाईलामा ने वैज्ञानिकों के साथ संवाद के दौरान दो मुख्य उद्देश्यों की बात कही। उन्होंने कहा कि पहला उद्देश्य तो ज्ञान का विस्तार करना है। दूसरा वैज्ञानिक समझ और धर्मनिरपेक्ष तरीके से प्रेम, करुणा, माफी के आंतरिक मूल्यों को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उच्च उन्नति के बावजूद मानव कष्ट और भावनात्मक संकट बढ़ रहे हैं। यह क्षण ऐसा है जब हम शांति और आराम का आनंद ले रहे हैं, लेकिन, उसी ग्रह पर सीरिया, यमन और अफ्रीकी राज्यों में यही इंसान मारे जा रहे हैं।
हम इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते। हम उदासीन नहीं हो सकते। हम तुरंत इन समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते हैं, लेकिन अगर हम प्रयास करें तो 21वीं सदी का हिस्सा थोड़ा बेहतर हो सकता है।
14वें तिब्बती धर्मगुरु ने मुख्य बौद्ध मंदिर में 33वीं माइंड एंड लाइफ कांफ्रेंस की अध्यक्षता की। विभिन्न देशों से करीब 200 वैज्ञानिकों, बुद्धिजीवियों और विचारकों ने इसमें भाग लिया।