डीएसपी साइबर क्राइम नरवीर सिंह राठौर ने बताया कि जब तक ठेकेदार अपने बंद नंबर को खुलवाता, तब तक ठगों ने उसके पैसे को करीब पंद्रह से ज्यादा वॉलेट में छोटी-छोटी रकम बनाकर ट्रांसफर कर दिया। चूंकि मामले में अभी तक ठेकेदार की गलती नजर नहीं आ रही है, ऐसे में आरबीआई को भी उसका पैसा रिफंड करने के लिए लिखा गया है। साथ ही इस बात की तहकीकात हो रही है कि आखिर बैंक के कस्टमर केयर पर की गई शिकायत शातिरों तक कैसे पहुंची।
ई-वॉलेट बना ठगों का नया हथियार
ठगों ने ई-वॉलेटों को ठगी के लिए नया हथियार बना लिया है। शिकार के बैंक खाते से ठग पैसा ई-वॉलेट में डाल देते हैं। चूंकि वॉलेट एक मोबाइल नंबर पर बन जाता है और वेरिफिकेशन के बिना भी इसे चलाया जा सकता है। ऐसे में फर्जी आईडी के आधार पर सिम लेकर धड़ल्ले से ई-वॉलेट के इस्तेमाल की शिकायत सामने आ रही है। डीएसपी राठौर ने बताया कि पिछले तीन महीने में करीब सौ से ज्यादा ऐसी शिकायतें आई हैं। जांच की जा रही है लेकिन फर्जी आईडी वाले नंबरों की वजह से ठगों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।