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ई-वॉलेट में ट्रांसफर कर दिए फ्रॉड के 24 लाख रुपये, साइबर क्राइम की जांच में खुलासा

Fri, 15 Nov 2019 10:39 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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सांकेतिक तस्वीर
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मंडी के एक ठेकेदार से हुई 24 लाख की ठगी के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। साइबर क्राइम विंग की जांच में पता चला है कि ठगों ने ठेकेदार के मोबाइल नंबर को बंद करवाकर दूसरा नंबर बिहार में एयरटेल से दूसरे सेवा प्रदाता की कंपनी में पोर्ट कराकर वहां के ही पते पर जारी करा लिया। इसके बाद उस मोबाइल नंबर की मदद से बैंक खाते व लोन अकाउंट खाते में रखे 12-12 लाख रुपये ई-वॉलेटों में डाल दिए। यही नहीं, उसमें से काफी पैसा आगे और दूसरे ई-वॉलेटों में भी डाल दिया है। अब जांच अधिकारी उन वॉलेटों के जाल को खंगालने में जुटे हैं।

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मंडी के सुंदरनगर निवासी ठेकेदार ने करीब डेढ़ महीने पहले पीएनबी के अपने एटीएम से पैसे निकालने का प्रयास किया लेकिन पैसे नहीं निकले। इसके बाद जब उसे पैसे निकालने का मैसेज पहुंचा तो उसने बैंक के कस्टमर केयर पर शिकायत दर्ज करा दी। शिकायत के बाद उसे फर्जी कॉल सेंटर से कॉल आया और पैसा वापस करने के नाम पर उसकी जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद उसका मोबाइल नंबर शातिरों ने दूसरी कंपनी में पोर्ट कर दिया और नए सिम के जरिये उसके खाते की रकम उड़ा ली।

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डीएसपी साइबर क्राइम नरवीर सिंह राठौर ने बताया कि जब तक ठेकेदार अपने बंद नंबर को खुलवाता, तब तक ठगों ने उसके पैसे को करीब पंद्रह से ज्यादा वॉलेट में छोटी-छोटी रकम बनाकर ट्रांसफर कर दिया। चूंकि मामले में अभी तक ठेकेदार की गलती नजर नहीं आ रही है, ऐसे में आरबीआई को भी उसका पैसा रिफंड करने के लिए लिखा गया है। साथ ही इस बात की तहकीकात हो रही है कि आखिर बैंक के कस्टमर केयर पर की गई शिकायत शातिरों तक कैसे पहुंची।

ई-वॉलेट बना ठगों का नया हथियार
ठगों ने ई-वॉलेटों को ठगी के लिए नया हथियार बना लिया है। शिकार के बैंक खाते से ठग पैसा ई-वॉलेट में डाल देते हैं। चूंकि वॉलेट एक मोबाइल नंबर पर बन जाता है और वेरिफिकेशन के बिना भी इसे चलाया जा सकता है। ऐसे में फर्जी आईडी के आधार पर सिम लेकर धड़ल्ले से ई-वॉलेट के इस्तेमाल की शिकायत सामने आ रही है। डीएसपी राठौर ने बताया कि पिछले तीन महीने में करीब सौ से ज्यादा ऐसी शिकायतें आई हैं। जांच की जा रही है लेकिन फर्जी आईडी वाले नंबरों की वजह से ठगों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।
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