राजधानी शिमला में हिमाचल की पहली साइबर फोरेंसिक लैब स्थापित होने जा रही है। करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से इस साइबर लैब को स्थापित किया जाएगा।
लैब की मदद से न सिर्फ प्रदेश में होने वाले साइबर अपराधों की जांच में गुणवत्ता आएगी, बल्कि प्रदेश पुलिस के जवानों को भी साइबर अपराधों से निपटने के लिए तैयार किया जा सकेगा।
फिलहाल, इसके लिए स्थान का चयन किया जा रहा है। प्रदेश में पिछले कुछ समय में साइबर अपराधों की संख्या तेजी के साथ बढ़ी है। कई बार ऐसे मामले आए, जिनमें विवेचना कर रहे अधिकारी को साइबर अपराध की विवेचना की जानकारी ही नहीं होती थी।
इसके अलावा कुछ मामलों में मोबाइल फोन या लैपटॉप जैसे उपकरण को स्कैन कर डाटा रिकवर करने में ही महीनों का समय लग जाता था। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए अब प्रदेश पुलिस अपनी साइबर फोरेंसिक लैब तैयार करने जा रही है।
आईजी साइबर क्राइम आनंद प्रताप सिंह ने बताया कि इस लैब को स्थापित करने के लिए स्थान का चयन करने की प्रक्रिया अंतिम दौर में है।
इसके बाद पंद्रह टर्मिनल लगाए जाएंगे और तकनीकी लैब तैयार की जाएगी।
साथ ही लैब के लिए कौन कौन से टूल व सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर खरीदने चाहिए, इसके लिए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और जेपी विश्वविद्यालय के तकनीकी एक्सपर्टों की मदद ली जा रही है।
कहा कि इस लैब के बनने से साइबर अपराधों से निपटने और मामलों को तेजी से सुलझाने में मदद मिलेगी।