इसी बीच सरकार ने लैब स्थापित करने और फॉरेंसिक का पूरा काम फॉरेंसिक साइंस विभाग को दे दिया। शुरू में तो पुलिस ने आपत्ति नहीं की लेकिन अब पुलिस के अधिकारियों ने जांच और ट्रेनिंग का काम प्रभावित होने का हवाला देते हुए इसे सीआईडी को देने की मांग की है। नाम न लिखने की शर्त पर सीआईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विवेचना में साइबर की जानकारी और जांच में बेहतर तालमेल के लिए साइबर लैब का पुलिस के अधीन होना जरूरी है।
उधर, एफएसएल ने साइबर लैब स्थापित करने का काम शुरू कर दिया है। एफएसएल शिमला के निदेशक अरुण शर्मा ने कहा कि केंद्र से बजट मिलने के बाद लैब स्थापित करने और उपकरणों की खरीद के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रयास किया जा रहा है कि जल्द से जल्द लैब शुरू हो जाए ताकि साइबर मामलों की जांच में वैज्ञानिक आधार वाला सहयोग दिया जा सके।