शिमला। कंगाली के दौर से गुजर रहे भाजपा शासित नगर निगम को बड़ा झटका लगा है। सरकार ने शहर के मर्ज एरिया में मूलभूत सुविधाएं देने के लिए दी जाने वाली वार्षिक ग्रांट पर कैंची चला दी है।
अब तक नगर निगम को सालाना तीन करोड़ रुपये मर्ज एरिया ग्रांट के तौर पर मिलते थे। लेकिन इस बार महज एक करोड़ रुपये मिले हैं। सूत्रों के अनुसार तीन अगस्त को सरकार की ओर से मर्ज एरिया ग्रांट का पैसा निगम के पास पहुंच चुका है। ग्रांट में भारी कटौती होने से नगर निगम प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। निगम में पहले ही आर्थिक तंगहाली चल रही है। पार्षदों की दर्जनों फाइलें बजट की कमी के चलते दफ्तर में धूल फांक रही हैं। शहर में कुल 18 वार्ड मर्ज एरिया में शामिल हैं। इन्हें पहले 14-14 लाख रुपये जारी होते थे। लेकिन इस बार ग्रांट कम होने पर सभी को पांच-पांच लाख रुपये ही नसीब हो सकेंगे। इतने कम बजट से नई सड़कें, पार्किंग, पार्क कैसे बनेंगे, इस पर निगम की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
इसलिए मिलती है मर्ज एरिया ग्रांट
शहर के 18 वार्डों में ज्यादातर इलाके ऐसे हैं जो साल 2006 में नगर निगम में शामिल किए हैं। यह पहले पंचायतों के अधीन थे। इनमें सड़क, सीवरेज, पेयजल, पार्किंग और पार्क जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं थी। इन्हें विकसित करने के लिए सरकार हर साल तीन करोड़ रुपये ग्रांट देती है। लेकिन इस बार यह ग्रांट कम कर दी गई है। इससे पहले साल 2012-13 और 2013-14 के दौरान भी निगम की ग्रांट बंद कर दी थी।
महापौर बेखबर, पार्षदों ने की ग्रांट बढ़ाने की मांग
मर्ज एरिया की ग्रांट कम होने की महापौर कुसुम सदरेट को सूचना नहीं है। मेयर ने बताया कि अभी इस साल की ग्रांट नहीं आई है। उधर, पार्षदों ने सरकार से ग्रांट बढ़ाने की मांग कर दी है। कांग्रेस पार्षद राकेश चौहान, दिवाकर शर्मा, कुसुमलता ठाकुर, रीता ठाकुर ने कहा कि मर्ज एरिया की ग्रांट बढ़ाई जानी चाहिए। भाजपा पार्षद शैलेंद्र चौहान ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो सरकार के पास जाकर ग्रांट बढ़ाने की मांग की जाएगी। पार्षद कमलेश मेहता और अर्चना धवन ने भी ग्रांट बढ़ाने की मांग की है। इस पर अब सदन में चर्चा की जाएगी।