क्रिप्टो करेंसी के नाम पर ठगी करने वाले नटवरलाल इस नेटवर्क को दुनियाभर में होने का दावा कर लोगों को झांसे लेते थे। इसी के साथ यूएसए के एक व्यक्ति को कंपनी का मालिक बताया गया था। कंपनी का मुख्यालय टीम लीडर को इंडोनेशिया में बताया गया और जीरकपुर में स्थानीय कार्यालय होने की बात बताई गई, लेकिन यहां कोई भी नहीं पहुंच पाया। अधिकतर बैठकें पांच सितारा होटलों में होती थीं। यह खुलासा क्रिप्टो करेंसी के नाम पर ठगी का शिकार हो चुके सुंदरनगर निवासी संजय ने किया।
संजय के अनुसार इस पूरे खेल के शातिर कई तरह से लालच देकर उनका पैसा लेते रहे। शातिर नकदी व अन्य माध्यमों से धनराशि भी देते रहे और फर्जी वेबसाइट पर डाॅलर दिखाते रहे। इसी के साथ सभी को सलाह दी जाती रही कि इन डाॅलर को स्टेक यानी वेबसाइट पर ही रहने दें। इससे स्थिति और मजबूत होगी और अधिक रुपये मिलेंगे। ऐसे में सैकड़ों लोगों ने निवेश किए गए धनराशि से मिलने वाली रकम भी नहीं ली और पूरे पैसे ही लुटा बैठे। संजय ने बताया कि एलएमएल यानी मल्टी लेवल मार्केटिंग के तहत चेन बनने पर उनके नीचे 400 से अधिक लोग जुड़ गए।
उनके अपने साढ़े सात लाख रुपये इस पूरे खेल में निवेश हुए थे। संजय के साथ जुड़े लोगों की बदौलत ही वह विदेश के तीन से चार दौरे भी कर चुका है। संजय ने बताया कि थाईलैंड समेत अन्य देशों में कंपनी के दौरे पर उन्हें चकाचौंध से अवगत करवाया जाता था। मौके पर विदेशी लोग भी बैठकों में शामिल होते थे। विदेशी लोगों के भी इस नेटवर्क में शामिल होने के बारे में बताकर उन्हें इस खेल में और निवेश के लिए प्रेरित किया जाता रहा। उधर, मंडी पुलिस थाना साइबर सेल के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनमोहन सिंह ने बताया कि शुक्रवार कुछ और शिकायतें मिली हैं। नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
अब तक 40 शिकायतों में 1000 से अधिक लोग ठगी के शिकार हुए हैं। मंडी साइबर पुलिस थाना को अब तक क्रिप्टो करेंसी के नाम पर ठगी की करीब 40 शिकायतें मिली हैं। इनमें 1000 से अधिक लोग ठगी के शिकार हुए हैं। इन लोगों से अनुमानित 25 करोड़ रुपये की ठगी की गई है। मंडी साइबर पुलिस थाना में शुक्रवार को कैहनवाल, सुंदरनगर क्षेत्र से बड़ी संख्या में ठगी के शिकार लोग पहुंचे और यहां अधिकारियों के समक्ष अपना दुखड़ा बताया। यहां टीम लीडर के साथ कुछ लोगों के बयान कलमबद्ध किए गए।
शिकायतकर्ताओं से ट्रांजेक्शन का पूरा विवरण लिया जा रहा है। इसमें नकदी और ऑनलाइन धनराशि शामिल है। इसी के साथ निवेश करने के बाद कितनी धनराशि वापस मिल चुकी है, इसकी भी पूरी जानकारी ली जा रही है। मई 2023 तक ठगी करते रहे और तीनों ही नटवरलाल इतने शातिर थे कि जगजाहिर होने के बावजूद लोगों को भ्रमित कर देते थे। लोग धनराशि न मिलने पर ढूंढते हुए शातिरों तक पहुंचते थे तो वह इन्हें दोबारा नई जगह निवेश करने का लालच देकर दोबारा चूना लगा देते। पीड़ितों के अनुसार, कई लोगों ने मई 2023 में भी दोबारा धनराशि इन्हीं शातिरों के कहने पर लगाई है। अब मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई तो पीड़ित सामने आने लगे हैं।