डीडीयू अस्पताल में मेडिकल बनवाने के लिए अलग काउंटर न होने से मरीजों को झेलनी पड़ रही परेशानी
विज्ञापन
पर्ची से लेकर टेस्ट फीस के काउंटर तक लगी रहीं लाइनें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल (डीडीयू) में इन दिनों निजी स्कूलों के विद्यार्थियों और स्टाफ नर्सों के मेडिकल प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आने से भारी भीड़ जुट रही है। इससे अस्पताल में बीमारियों का उपचार करवाने आ रहे मरीजों की दिक्कतें बढ़ गईं हैं। मरीजों को पर्ची काउंटर और अलग-अलग टेस्ट करवाने के लिए फार्म भरने तथा पर्ची कटवाने के लिए घंटों कतारों में खड़े होकर इंतजार करना पड़ रहा है।
डीडीयू अस्पताल में शनिवार को मरीजों की संख्या कम रहती है, लेकिन इस शनिवार को दोपहर बाद तक पर्ची काउंटर और टेस्ट के लिए फीस जमा करवाने वालों की लंबी कतारें लगी रहीं। इससे कतारों में खड़े आम मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी। लोगों ने कहा कि मेडिकल करवाने आने वालों के लिए अलग काउंटर स्थापित किया जाए या फिर स्कूलों में ही इसकी व्यवस्था करें ताकि इस कारण अस्पतालों में मरीजों को परेशान न होना पड़े। काउंटर पर तैनात स्टाफ को भी समय से कार्य निपटाने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। अस्पताल में शनिवार को दोपहर एक बजे के तक पर्ची काउंटर पर लंबी लाइन लगी हुई थी।
विज्ञापन
शहर के एक निजी स्कूल से मेडिकल बनवाने को इस सरकारी अस्पताल में भारी संख्या में विद्यार्थी पहुंचे थे। अस्पताल में करीब एक हजार से अधिक पर्चियां बनीं थीं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि किसी को मना नहीं किया जा सकता। मेडिकल बनवाने आने वालों का काम भी निपटाना पड़ता है। मेडिकल करवाने आए छात्र-छात्राओं के अभिभावकों ने कहा कि दो दिन से वह मेडिकल बनवाने के लिए अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। निजी लैब में जरूरी टेस्ट भी करवाने पड़ रहे हैं, इसमें खर्चा भी हो रहा है। मेडिकल बनवाने के लिए अलग से दो सौ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। अस्पताल में उपचार करवाने को आए और पर्ची की कतार में खड़े कुछ मरीजों से बात करने पर उन्होंने अपनी परेशानी बताई। वहीं अस्पताल के एमएस डॉक्टर लोकेंद्र शर्मा ने बताया कि स्टाफ कम है, इसके बावजूद लोगों को बेहतर सेवा मुहैया करवाने का प्रयास कर रहे हैं।
एक घंटे से खड़ी हूं लाइने में
टांगों में दर्द का उपचार करवाने आई बुजुर्ग महिला सुमन शर्मा ने बताया कि एक घंटे से पर्ची बनवाने को लाइन में इंतजार कर रही हूं। आज शनिवार सोच के आई थी कि भीड़
कम होगी, यहां भीड़
बाकी दिनों के मुकाबले अधिक है।
-सुमन शर्मा, सोलन के कैथलीघाट
बच्ची की नहीं बन पाई पर्ची
अपनी बच्ची की आंखें दिखाने को आई थी। अब तो लंच भी होने वाला है, पता नहीं नंबर अब लंच के बाद ही पड़ेगा। इसके बाद पता नहीं डॉक्टर भी मिलेंगे या नहीं। यहां भीड़ बहुत ज्यादा है। -रीना देवी, शिमला
यहां तो पर्ची बनाना ही मुश्किल
मैं और बेटी अस्पताल में उपचार करवाने को आई थीं, साढ़े ग्यारह बजे पहुंच गई थी, अब एक बजने वाला है, अभी लाइन लंबी है, सोच रही हूं कि किसी और दिन अस्पताल आएं।
अब खड़े होना हो रहा मुश्किल
हड्डियों में दर्द है उसे दिखाया था डॉक्टर को, दस बजे आ गई थी, पहले पर्ची की लाइन में खड़ी रही, अब एक्सरे करवाने को फार्म भरने के बाद फीस जमा करवाने की लंबी लाइन में लगी हूं। अब खड़े होना भी मुश्किल हो रहा है। -गैरो देवी, सिरमौर