सूचना मिली कि हिमाचल प्रदेश के लोगों को प्रशासन घर पहुंचाने की व्यवस्था कर रहा है। जेब मे रुपये नहीं, घरवाले अलग परेशान थे। बस यही दिमाग में आया और रात लगभग ढाई बजे मोहाली से पैदल चल दिये, ताकि लाइन में सबसे पहले लगें और जल्दी घर जाने को मिले। लेकिन सुबह के साढ़े 10 बजे तक नंबर नहीं आया। अब थोड़ी हताशा होने लगी है। यह कहना है हिमाचल प्रदेश कांगड़ा निवासी विनय का।
सेक्टर- 28 स्थित हिमाचल भवन के बाहर न जाने कितने ऐसे लोग थे जो बस किसी तरह अपने घर पहुंचना चाहते थे। न कोई सोशल डिस्टेंसिग और न कोई व्यवस्था। बावजूद इसके लोग सुबह चार बजे से लाइन में आकर लगे थे। इस दौरान कुछ युवाओं ने कहा कि जिस कंपनी में काम कर रहे थे, वहां से सैलरी नहीं मिल रही। किराया देने तक को रुपये नहीं है। इसलिए घर जाना ही एक मात्र विकल्प है।
पुलिस ने बुजुर्गों पर चलाई लाठियां, कहा केवल छात्र जाएंगे
अपने प्रदेश जाने की सूचना मिलते ही काफी संख्या में लोग हिमाचल भवन पहुंच गए। यह देख पुलिसकर्मियों के भी हाथ पैर फूलने लगे। बस फिर क्या था उन्होंने लाठियां चलाना शुरू कर दिया। लॉकडाउन से पहले चंडीगढ़ पीजीआई इलाज कराने के आए बुजुर्ग भी घर जाने के लिए रविवार सुबह अंधेरे में ही हिमाचल भवन पहुंच गए।
उन्होंने बताया कि सुबह रजिस्ट्रेशन के लिए लाइन में लगे होने के बाद जब भीड़ होने लगी तो पुलिस ने बुजुर्गों और महिलाओं पर लाठियां चलाई और भगा दिया। पुलिस का कहना था कि बसें सिर्फ स्टूडेंट्स के लिए हैं। इस दौरान आधे लोग वापिस अपने घर चले गए। बाद में पुलिस ने बाकि बचे लोगों को लाइन में लगकर रजिस्ट्रेशन करवाने को कहा।
पालमपुर निवासी बुजुर्ग ओपी सूद ने बताया कि वह चंडीगढ़ में अपनी बेटी से मिलने आए थे। लेकिन कर्फ्यू के कारण डेढ़ महीने से चंडीगढ़ में ही फंसे है। उन्होंने बताया वो सुबह 6 बजे हिमाचल भवन आकर लाइन में लगे थे, लेकिन पुलिस ने लाठियां मारकर उन्हें हटा दिया कहा सिर्फ स्टूडेंट्स को जाने की परमिशन है। जब आधे लोग मायूस होकर घर लौट गए, तब पुलिस ने उनकी लाइन बनवाई। बताया वह शुगर के मरीज है, बुजुर्गों के लिए अलग से कोई पंक्ति नहीं बनवाई गई। 10 बजे उनकी रजिस्ट्रेशन हुई और एक बजे तक बस नहीं चली थी।
पीजीआई में गठिये के इलाज को आए कर्फ्यू में फंसे
पालमपुर के गांव दुर्ग निवासी बुजुर्ग मलाथन ने बताया कि कर्फ्यू से पहले वो पीजीआई में गठिया के इलाज के लिए आए थे। लेकिन कर्फ्यू के कारण वे वापस अपने घर नहीं जा पाए। तबसे वे अपने एक रिश्तेदार के यहां रह रहे थे। उन्होंने बताया सुबह वे लाइन में लगे थे। 3-4 घंटे के बाद उनकी रजिस्ट्रेशन हुई। दोपहर के एक बज गए हैं कोई खाना पीना नहीं हुआ। 11 बजे के बाद एक एनजीओ ने सभी को पानी की बोतल दी। उन्होंने बताया बस पालमपुर छोड़ेगी उससे आगे गांव तक जाने की कोई व्यवस्था नहीं है।
खाने और किराया देने को नहीं बचे थे रुपये
कांगड़ा निवासी विनय ने बताया वो मोहाली के सेक्टर-57 में किराए पर रहते हैं। वह सुबह ढाई बजे पैदल मोहाली से चंडीगढ़ हिमाचल भवन के लिए निकले और 4.30 बजे पहुंचे। सुबह 6 बजे बसों के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हुई। उन्होंने बताया वह टेलीकम्युनिकेशन कंपनी में काम करते हैं। दो महीने से उन्हें सैलरी नहीं मिली है। सारी सेविंग्स खत्म हो गई है। अब घर का किराया और खाने के लिए रुपये नहीं बचे थे।
किडनी में पथरी, नहीं करवा पा रहे थे इलाज
कांगड़ा निवासी गणेश ने बताया कि वह मोहाली 68 में पीजी में रहते हैं। वे यहां टेक्सटाइल कंपनी में काम करते हैं। लेकिन कर्फ्यू के कारण उन्हें तनख्वाह नहीं मिल रही थी। उनके किडनी में पथरी है। यहां वो अपना इलाज नहीं करवा पा रहे थे। इसलिए जब तक सब नॉर्मल नहीं होता वो घर जा रहे हैं।
लॉकडाउन से चंडीगढ़ में फंसे हिमाचल प्रदेश के लोगों को लेने के लिए जब बसें पहुंचीं तो कई के आंसू छलक आए। अपनों से मिलने की बेताबी में लोग बोलते-बोलते भावुक हो गए। लोगों ने कहा कि शहर में कोई दिक्कत नहीं हुई, यूटी प्रशासन के लॉकडाउन और कर्फ्यू के दौरान किए गए प्रयास सराहनीय हैं। कोरोना जब खत्म हो जाएगा तो वह फिर से सिटी ब्यूटीफुल लौटकर आएंगे। फिलहाल घर की चिंता यहां नहीं रहने दे रही है।
रविवार को सुबह सेक्टर-28 स्थित हिमाचल भवन के सामने ऐसा ही माहौल था। किसी को घर पहुंचने की जल्दी थी तो कोई बच्चों को याद कर रो रहा था। ऊना के रहने वाले रविंद्र पराशन ने बताया कि जब हमें यह पता चला कि घर जाने के लिए हिमाचल प्रदेश से बसें आ रहीं हैं तो घर जाने की खुशी में अनायास ही आंसू छलक आए। अब वह घर जाकर परिजनों से मिलेंगे। सब कुछ अच्छा हो जाएगा तो वह वापस चंडीगढ़ लौट आएंगे। वह यहां सेक्टर-17 स्थित एक कपड़े के शोरूम में सेल्स मैनेजर हैं।
वहीं, हमीरपुर के रहने वाले छात्र शिवम डोगरा ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ चंडीगढ़ में रहते हैं। लॉकडाउन से पहले वह अपने बच्चे को घर दादा और दादी के पास छोड़कर आए थे, इस बीच लॉकडाउन हो गया और वह फंस गए। अब वह अपने बच्चे से मिल पाएंगे। यह कहकर अनायास ही उनकी आंखों से आंसू छलक आए। कांगड़ा निवासी सुरेश नौटियाल ने बताया कि घर जाने का यह बेहद भावुक पल है। हालांकि चंडीगढ़ में लॉकडाउन के दौरान उन्हें कोई दिक्कत नहीं हुई। यहां के प्रशासन द्वारा लोगों की मदद के लिए शानदार व्यवस्था की है, सब कुछ ठीक हो गया तो वह जल्द ही चंडीगढ़ वापस आएंगे।
जी भर के प्यार करूंगी अपने नौनिहाल को
बस के जरिए हिमाचल जाने के लिए लाइन में खड़ी एक मां ने वहां खड़े कई लोगों के आंसू छलका दिए। मां ने बताया कि उसका बच्चा अभी छह माह का है। कुछ दिक्कत थी तो पीजीआई आई थी दिखाने के लिए, लेकिन लॉकडाउन के कारण चंडीगढ़ में फंस गई। कई बार घर जाने के लिए डीसी ऑफिस और यूटी के अन्य कार्यालय पहुंची, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। अब घर जा रही हूं, जी भर के अपने नौनिहाल को प्यार करूंगी।
लॉकडाउन में चंडीगढ़ में फंसे हिमाचल मूल के लोगों की भीड़ सेक्टर-28 स्थित हिमाचल भवन में उमड़ पड़ी। बस में बैठने की जल्दी में लोग सोशल डिस्टेसिंग का पाठ भी भूल गए। लोगों को काबू करने के लिए चंडीगढ़ पुलिस के जवानों को लोगों के साथ सख्ती से पेश आना पड़ा। पुलिस के सख्त रुख के बाद ही लोग शांत हुए और लाइन में लग गए।
लॉकडाउन में फंसे लोगों के लिए हिमाचल प्रदेश की ओर से रविवार को लगभग 60 बसों का पहला बेड़ा भेजा गया। इसकी पूर्व में ही सूचना शहर में जाने वाले लोगों को दे दी गई थी। इसके बाद घर जाने के लिए लोग सुबह ही हिमाचल भवन पहुंच गए। बसों के आने के बाद बैठने की जल्दी में लोगों में होड़ मच गई। कुछ ही देर में लोगों का भवन में हुजूम उमड़ पड़ा। अव्यवस्थित हो रही भीड़ को काबू करने के लिए वहां तैनात चंडीगढ़ पुलिस के जवानों को लोगों के साथ सख्ती से पेश आना पड़ा। इसके बाद लोगों को जबरन लाइन में लगाना पड़ा और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना पड़ा।
चार जिलों से आईं थीं बसें
हिमाचल भवन से मिली जानकारी के अनुसार हिमाचल के कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर और चंबा जिले के लोगों को लेने के लिए बसों का पहला बेड़ा रविवार को चंडीगढ़ पहुंचा था। जिलों के लोगों के पहचान पत्र देखकर बसों में स्थान दिया गया। जानकारी के अभाव में बहुत से ऐसे लोग पहुंचे जो इन चार जिलों से ताल्लुक नहीं रखते थे, मजबूरी में उन्हें घर वापस जाना पड़ा।
हिमाचल पुलिस भी साथ पहुंची
लोगों को सही सलामत घर पहुंचा सकें इसके लिए बसों में कुछ हिमाचल पुलिस के जवान भी हिमाचल भवन पहुंचे थे। बसों में बैठाने के दौरान लोगों द्वारा की जा रही अव्यवस्थाओं को लेकर जवानों द्वारा लोगों को काफी समझाया गया। कहीं-कहीं पुलिस को लोगों के साथ सख्ती से भी पेश आना पड़ा।
चंडीगढ़ प्रशासन की हिमाचल भवन में घोर लापरवाही देखने को मिली। घर जाने के लिए हिमाचल भवन पहुंचे लोगों की थर्मल स्कैनिंग की कोई व्यवस्था प्रशासन की ओर से नहीं की गई थी। इसको लेकर लोगों ने हैरानी प्रकट की। इसके साथ ही मौके पर प्रशासन का कोई भी बड़ा अधिकारी उपस्थित नहीं होने से लोगों को परेशान होना पड़ा।
सर्विलांस पर रहेंगे फोन, रहना होगा होम क्वारंटीन
बसों से हिमाचल जाने वाले लोगों का हेल्थ चेकअप होने के बाद इनके फोन को सर्विलांस पर रखा जाएगा। इसके साथ ही 14 दिन लोगों को प्रशासन के अधिकारियों की देखरेख में होम क्वारंटीन रहना होगा। हिमाचल भवन में मौजूद एक अधिकारी ने बताया कि होम क्वारंटीन रहने वाला व्यक्ति घर से बिना क्वारंटीन टाइम पूरा कर बाहर निकलेगा तो उसे सर्विलांस टीम द्वारा पकड़ लिया जाएगा।