न्यायालय ने इस मामले में खेद जताया था कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्यों नहीं अभियोजन स्वीकृति आज तक ली गई। इन लोगों के खिलाफ यह आरोप था कि इन्होंने पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए बनाए गए नियमों का उल्लंघन किया।
जिस कारण कानूनों के प्रावधानों के अनुसार उनके खिलाफ आपराधिक मामला चलाए जाने के लिए राज्य सरकार की ओर से अभियोजन स्वीकृति दिया जाना आवश्यक था। 29 जुलाई 2016 को हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव ने राज्य सरकार से इन लोगों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दिए जाने की मांग की थी।
23 अक्तूबर 2017 को हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेशों के तहत दो दिनों के भीतर इस बाबत निर्णय लिया जाना था। न्यायालय ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति दिए जाने बाबत कोर्ट के समक्ष अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने के आदेश जारी किए हैं।