एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग ने टैक्स क्रेडिट के नाम पर 80 करोड़ के घोटाले का खुलासा किया है। बीबीएन और परवाणू की करीब 52 कंपनियां इस गोरखधंधे के नेटवर्क से जुड़ी हैं। इन फर्मों ने टैक्स क्रेडिट पर मिलने वाले लाभ के लिए सरकार की आंखों में धूल झोंकी है। फर्जी फर्में बनाकर खरीदारी करके इन कंपनियों ने सरकार से टैक्स क्रेडिट के रूप में मिलने वाली रीबेट हासिल की है। हैरत यह है कि खरीदारी के बाद सामान पहुंचाने के जो नंबर दस्तावेजों पर इंगित हैं, जांच के दौरान वे नंबर स्कूटरों, आटो, मोटरसाइकिलों और एचआरटीसी की बसों के निकले हैं।
जिला सोलन में इस महा घोटाले में जिले के कई बड़े औद्योगिक परिवार शामिल हैं। मामला सामने आने के बाद फ्लाइंग स्कवायड ने 52 कंपनियों को नोटिस निकालते हुए छह करोड़ आठ लाख की रिकवरी निकाली है। इस घोटाले का पर्दाफाश करने वाली टीम में ईटीओ प्रदीप शर्मा, एईटीओ चंद्रशील भुटानी, इंस्पेक्टर अमित कश्यप, चैन कुमार और राजेश कुमार शामिल हैं।
52 कंपनियों को नोटिस जारी
आबकारी एवं कराधान विभाग के उप आयुक्त दक्षिण क्षेत्र उड़नदस्ता डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि 52 कंपनियों को नोटिस जारी किए हैं। 6.8 करोड़ की रिकवरी डाली गई है। इसमें करीब डेढ़ करोड़ वसूले जा चुके हैं। रिकॉर्ड की जांच चल रही है, जिसके बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
यह है टैक्स क्रेडिट
राज्य में अगर कोई डीलर किसी से कच्चा माल या अन्य सामान खरीदकर आगे बेचता है तो तीसरी पार्टी को सामान सौंपते वक्त टैक्स क्रेडिट के रूप में लाभ दिया जाता है क्योंकि सामान की खरीदारी के वक्त सरकार को टैक्स की अदायगी कर दी जाती है। लिहाजा, तीसरी पार्टी तक सामान पहुंचने में यह रीबेट दिया जाता है।
यह है पूरा मामला
सबसे अधिक फर्म बद्दी और परवाणू की हैं। नालागढ़ की बेहद कम फर्में इस गोरखधंधे में जुड़ी हुई हैं। डॉ. सुनील के मुताबिक कुछ फ र्मों ने जाली फर्में खड़ी करके परचेज दिखा दी। सामान आगे बेचकर टैक्स क्रेडिट ले लिया गया जबकि खरीदारी करने वाली फर्म का कोई अस्तित्व ही नहीं था।
ऐसे आए पकड़ में
करीब तीन माह पहले बद्दी में पकड़े गए दिल्ली के उद्योगपति के बाद विभाग की शक की सुई अन्य उद्यमियों पर भी घूमी। विभाग ने सर्वे करते हुए कुछ फर्मों को चिह्नित किया जबकि रिकॉर्ड चेकिंग के दौरान भारी अनियमितताएं पाई गईं, जिस पर विभाग ने कर व जुर्माना वसूला।