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करंसी मामले में बढ़ीं तिब्बती धर्मगुरु की मुश्किलें

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हिमाचल हाईकोर्ट ने तिब्बती धर्मगुरु करमापा लामा से जुड़े एक निजी गाड़ी से पकडे़ गए एक करोड़ रुपये के मामले में निचली अदालत में चल रहे आपराधिक केस की कार्यवाही को जारी रखने के आदेश दिए हैं। करमापा लामा के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले की कार्यवाही को न्यायिक दंडाधिकारी ऊना ने हिमाचल सरकार के आवेदन पर निरस्त कर दिया था।
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राज्य सरकार ने अपने आवेदन में दलील दी थी कि तिब्बती धर्मगुरु होने के नाते और भारत- तिब्बत रिश्तों को ध्यान में रखते हुए करमापा लामा पर साजिश रचने के आरोप वापस लिए जाएं। निचली अदालत ने सरकार के इस आवेदन को स्वीकार करते हुए करमापा के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले की कार्यवाही को 21 मई 2012 के आदेशों के तहत निरस्त कर दिया था।
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दंजोग नांग त्सोग्या ने हाईकोर्ट में दायर की थी खचिका

इस आदेश को प्रार्थी दंजोग नांग त्सोग्या की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर ने प्रार्थी की याचिका को स्वीकारते हुए निचली अदालत की ओर से पारित आदेशों को अब रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह करमापा लामा के खिलाफ भारतीय कानून के तहत कार्यवाही जारी रखे।

यह था मामला- 26 जनवरी, 2011 को पुलिस ने मैहतपुर नाके पर नंगल से ऊना की तरह जा रही गाड़ी से एक करोड़ रुपये की राशि जब्त की। गाड़ी के ड्राइवर संजोग दत्त और आशुतोष शर्मा ने खुद को पत्रकार बताया और पुलिस को एक करोड़ रुपये की जाली रसीद दिखाई। पुलिस ने शक के आधार पर दोनों को हिरासत में लिया।

मामले की जांच के दौरान पाया गया कि ये पैसा तिब्बती संस्था करमा गारचीन ट्रस्ट सिध्वादी के माध्यम से धर्मशाला में भूमि खरीदने के लिए प्रदेश में लाया गया था। जांच में यह भी पाया गया कि यह पैसा गाड़ी के ड्राइवर को ट्रस्ट के कैशियर ने दिया था।
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