एसआईटी का नेतृत्व एएसपी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौके पर एफएसएल और मेकेनिकल जांच भी करवाई गई है। एफएसएल की टीम ने कुछ सैंपल जुटाए हैं। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट का इंतजार है।
बकरास में एसआईटी ने करीब 15 लोगों से सोमवार को पूछताछ की। राजपूत समाज एवं सर्वदलीय बैठक के बाद लोगों की भीड़ शिलाई थाना के बाहर पहुंची और मामले की निष्पक्षता से जांच की मांग की।
यह मांग भी दोहराई कि जब तब पुलिस को कोई ठोस सबूत नहीं मिलते, मामले से धारा 302 और एट्रोसिटी की धारा को हटाया जाए। कुछ लोगों ने शिलाई में भारी पुलिस फोर्स की तैनाती पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि आखिर पुलिस फोर्स की क्या जरूरत पड़ी? सभी लोग शांतिप्रिय हैं।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की सोमवार को आपातकालीन बैठक अधिवक्ता बीएम चौहान की अध्यक्षता में हुई। इसमें सिरमौर जिले के शिलाई निवासी केदार सिंह जिंदान की शुक्रवार को की गई हत्या पर रोष प्रकट किया गया।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य के नाते वकीलों ने सोमवार को अदालती कार्यवाई से खुद को अलग रखा। वकीलों ने इस हत्याकांड की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए हाईकोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की अपील की।
बैठक में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर पीड़ितों को न्याय दिलाने का आह्वान करते हुए निर्णय लिया गया कि हाईकोर्ट के समक्ष वरिष्ठ वकील मामले की जांच की दिशा पर नजर रखते हुए पैरवी करेंगे। एसोसिएशन स्वयं भी एक रिट याचिका दायर करेगी।
इसका दायित्व अधिवक्ता रजनीश को सौंपा गया। वकीलों ने पुलिस जांच पर शंका जताते हुए किसी निष्पक्ष ऐजेंसी से इस हत्या की जांच करवाने की मांग की। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और डीजीपी को ज्ञापन सौंपने का फैसला भी लिया।
वकीलों ने उन सभी दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाई की मांग भी की जिन्होंने समय रहते जिंदान को सुरक्षा मुहैया नहीं करवाई। स्थानीय पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के तुरंत तबादले व गवाहों को उचित सुरक्षा मुहैया करवाने की मांग भी की गई है।
जिंदान हत्याकांड मामले में एससी-एसटी एक्ट के तहत समय पर केस दर्ज न करने पर भी आपत्ति प्रकट की गई। चर्चा के दौरान बताया गया कि जिंदान शिलाई के आरटीआई एवं सामाजिक कार्यकर्ता थे।
जिन्होंने जनहित में कई भ्रष्टाचार उजागर किए थे। प्रशासन से मांग की गई कि दिवंगत परिवार को तत्काल फौरी राहत और सुरक्षा दी जाए।