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कूहल के निर्माण में लाखों का घपला, चार ठेकेदारों पर केस

Thu, 09 Feb 2017 09:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चैतन्य ठाकुर
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सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग (आईपीएच) के दो अफसरों और 4 ठेकेदारों की मिलीभगत से कूहल निर्माण में लाखों के घपले का खुलासा हुआ है। शुरुआती जांच के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने अब अफसरों और ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। जांच में पाया गया है कि कूहल निर्माण में घटिया निर्माण सामग्री और कम सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है। 
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जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में सात किलोमीटर लंबी चेम्बक वारी चेवर कूहल का निर्माण किया गया है। विजिलेंस को सूचना मिली थी कि निर्माण में घोटाला हुआ है। सूचना मिलने पर विजिलेंस के एक इंस्पेक्टर, उसके बाद सब इंस्पेक्टर और आखिर में एक और सब इंस्पेक्टर ने तीन बार मामले की जांच कर रिपोर्ट तैयार की।

इसी रिपोर्ट के आधार पर विजिलेंस ने आईपीसी की धारा 406, 420, 120 बी व 13(2) पीसी एक्ट के तहत मुकदमा कायम किया गया है। एफआईआर में एसडीओ सुशील कुमार कटोच, जेई भीम सिंह और ठेकेदार जंग बहादुर, छेरिंग, सुरेंद्र सिंह और सोहन सिंह को नामजद किया गया है।
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2006 में शुरू हुआ कूहल का निर्माण

सात किलोमीटर लंबी चेम्बक वारी चेवर कूहल का निर्माण साल 2006-07 में शुरू हुआ। साल 2011-12 तक कुल 184.85 लाख रुपये मंजूर हुए। जुलाई 2012 तक 190.63 लाख व्यय हुए, जिसमें 37 ठेकेदारों को काम बांटा गया।

किस ठेकेदार को क्या काम दिया
आरडी नंबर 0/800 : ठेकेदार जंग बहादुर, गांव-डाकघर उदयपुर
आरडी नंबर 1/480 :  छेरिंग, गांव-डाकघर गोंदला
आरडी नंबर 7/900 : सुरेंद्र सिंह गांव-डाकघर शांशा
आरडी नंबर 8/250 : सोहन सिंह गांव-डाकघर गोशाल
(यह काम कनिष्ठ अभियंता भीम सिंह और सहायक अभियंता सुशील की देखरेख में हुआ था। इसलिए विजिलेंस ने इन्हें भी एफआईआर में नामजद किया है)
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चरस तस्कर के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस

प्रवर्तन निदेशालय ने चरस तस्करी के आरोपी दीपराम के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा दर्ज किया है। ईडी अब  इसकी आय से अधिक अर्जित संपत्तियों का रिकॉर्ड खंगालेगी। शिमला पुलिस ने दीपराम पर शिकंजा कसने के बाद प्रवर्तन निदेशालय से मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की थी।

पुलिस जांच में दीपराम की काफी संपत्ति अलग-अलग जगह पर पाई गई थी। जांच में सामने आया था कि आरोपी ने आय से अधिक संपत्ति बनाई है। बताते चलें कि पुलिस ने 25 मार्च को शिमला के उपनगर टुटू के दिव्यनगर में चरस माफिया दीपराम के घर दबिश दी थी। उसके घर से करीब 8 कि लो अफीम और 8 किलो चरस बरामद हुई थी।

करीब पौने तीन लाख जब्त किए थे। दो युवकों की मदद से पुलिस आरोपी के अड्डे तक पहुंची। दोनों ने दीपराम से चरस खरीदी थी। आरोपी उस समय घर पर नहीं था। पुलिस ने उसे दबिश के अगले दिन गिरफ्तार किया। दीपराम की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने

त्यूणी में अफीम सप्लायर मेहर सिंह को हिरासत में लिया था। इसके बाद मामला जांच के लिए नारकोटिक्स ब्यूरो को सौंपा गया। नारकोटिक्स जांच में आरोपी के दो घर अवैध धंधे की कमाई से बनाए पाए गए हैं। इसमें एक घर निर्माणाधीन है। एक घर वह है, जिससे चरस और अफीम बरामद हुई थी।

दीपराम के खिलाफ अदालत में दाखिल है चार्जशीट
शिमला पुलिस आरोपी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। चार्जशीट में चरस कारोबारी दीपराम, उसकी पत्नी उषा देवी के साथ अमन, विपन और चरस सप्लायर मेहर सिंह को नामजद किया गया है।

ईडी ने शिमला पुलिस से मांगी मदद 
प्रवर्तन निदेशालय शिमला के सहायक प्रवर्तन अधिकारी प्रदीप ने पत्र लिखकर मामले में शिमला पुलिस से मदद मांगी है। इसमें दीपराम के बैंक खातों और संपत्ति का विवरण मांगा है। ईडी ने यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत दर्ज किया है। इस बारे में जब प्रवर्तन निदेशालय के संबंधित अधिकारी से बात करनी चाही तो उन्होंने मीडिया में किसी भी टिप्पणी देने से इनकार कर दिया।
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