इसके बाद दोपहर को दोनों भाई घर पहुंच गए। उन्होंने पूरी कहानी घरवालों को बताई। इससे परिवार वालों के हाथ-पांव फूल गए। यह बात आग की तरह फैल गई। बड़ी संख्या में लोग बच्चों के घर पहुंच गए। कुछ लोग फोन पर हालचाल पूछने लगे। इस बीच किसी ने इस बारे में पुलिस को सूचना दे दी।
मामला पुलिस में पहुंचने पर इन बच्चों का मेडिकल करवाया गया। इसमें किसी भी तरह का कोई नशीला पदार्थ न देने की पुष्टि हुई। उसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी की फुटेज भी देखी। पुलिस जांच में ऐसी कोई भी घटना होने का कोई भी सबूत नहीं मिला।
इसके बाद बच्चों ने अध्यापिका के पास ये खुलासा किया कि वो निजी बस से आए और स्कूल से आगे शनि मंदिर के पास जाकर उतर गए। वहां एक दुकानदार से दस रुपये लिए और वापस आ गए।
सिविल अस्पताल गगरेट के चिकित्सक महेश्वर ने बताया कि बच्चों की जांच करने पर पाया गया कि उन्हें किसी भी तरह का कोई नशीला पदार्थ नहीं दिया गया है।
झूठी निकली बच्चों की कहानी : हरनाम
गगरेट पुलिस थाना प्रभारी हरनाम सिंह ने कहा कि बच्चों की ओर से बताई कहानी के अनुसार पुलिस ने सभी पहलुओं की जांच की, लेकिन सभी बातें झूठी पाई गई।