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बाबा-चेले ने ईलाज के बहाने किया बेऔलाद महिला से रेप

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बच्चा पाने के लिए भटक रही निसंतान महिला का उपचार करने के बहाने एक बाबा और चेले ने उसके साथ दुराचार कर दिया। महिला पंजाब की रहने वाली है। दुराचार का यह मामला हिमाचल के कांगड़ा में पेश आया है।
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यहां इंदौरा क्षेत्र के धमोता गांव के एक बाबा व उसके चेले के खिलाफ मुकेरियां (पंजाब) की शादीशुदा महिला ने कथित तौर पर दुराचार, अश्लील हरकतें करने व जान से मारने की धमकियां देने की शिकायत दर्ज करवाई है।

मुकेरियां थाने में दर्ज शिकायत में पीड़िता ने कहा कि उसका पति पंजाब पुलिस में कार्यरत है। वह पिछले साढ़े पांच साल से शादीशुदा है व बेऔलाद है। अगस्त 2014 में उसके पति ने काका पहलवान से बेऔलाद होने की समस्या के बारे में बात की। काका पहलवान ने उनको इंदौरा क्षेत्र के गांव धमोता में शिवदयाल बाबा का आशीर्वाद लेने को कहा। दो दिन बाद काका पहलवान उनको धमोता ले गया।
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घर आकर बाबा चेले ने किया रेप

उसके बाद बाबा उन्हें लगातार कुछ दिन अपने घर बुलाता रहा। इसके बाद बाबा व उसके चेले का घर में जाना-जाना शुरू हो गया। एक दिन जब वह अपने घर में अकेली थी तो वह बाबा व उसका चेला उसके घर में आए। उसने उन्हें चाय पान कराया। उसके बाद बाबा ने उसे कमरे में बुलाया।

महिला का आरोप है कि ढोंगी बाबा व चेले ने पहले उसके साथ इलाज के बहाने अश्लील हरकतें शुरू कर दी और फिर दुराचार किया। उन्होंने कहा कि यदि तुझे बच्चा चाहिए तो इसके बारे में किसी को कुछ न बताए। अगर किसी को भी बताया तो वह उसे व उसके पति को जान से मार देंगे।

पहले तो वह चुप रही, लेकिन बाद में उसने सारी आपबीती पति को बताई। डीएसपी मुकेरियां नानक चंद ने बताया कि पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। जल्द ही हिमाचल पुलिस की मदद से आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

पुजारी ने की थी ईज्जत लूटने की कोशिश, सजा

वहीं, मंडी में संतान के लिए धार्मिक अनुष्ठान के बहाने महिला से दुराचार का प्रयास करने के आरोपी पुजारी (गूर) को अदालत ने दस साल के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।

न्यायालय ने चच्योट तहसील के खीरा (शेगली) निवासी चंद्रमणी पुत्र कांशी राम के खिलाफ भादंस की धारा 376(एफ), 511 और 342 के तहत अभियोग साबित होने पर क्रमश: दस साल और एक साल के कठोर कारावास और पांच हजार जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार पीड़िता की शादी घटना से करीब पांच साल पहले हुई थी, लेकिन उनकी कोई संतान न होने के कारण परिवार के सदस्य उसे स्थानीय देवता बाला कमेश्वर की शरण में ले गए। विगत दो मार्च 2013 को स्थानीय देवता बाला कमेश्वर पीड़िता के गांव कटवांडी में किसी जन्मदिन पर आए थे। पीड़िता के ससुर भी वहां गए थे।

आरोपी चंद्रमणी ने देवता का पुजारी व प्रवक्ता (गूर) होने के नाते उन्हें कहा कि पीड़िता को 13 मार्च 2013 को उनके घर में पवित्र पानी लेने के लिए आना होगा। उस दिन पीड़िता अपनी सास के साथ सुबह दस बजे आरोपी के घर पहुंची। आरोपी ने पीड़िता की सास को वहां से दूर जाने को कहा और उन्हें बताया कि पीड़िता को पांच दिन के बाद वापस लौटना होगा।
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अकेला पाकर रेप की कोशिश

आरोपी ने पीड़िता को कहा कि वह रात दस बजे के बाद इलाज शुरू करेगा। मामले के तथ्यों के मुताबिक आरोपी पीड़िता को रसोईघर में ले गया और धार्मिक कर्मकांड शुरू कर दिया। इसी बीच आरोपी ने पीड़िता के साथ दुराचार करने का प्रयास किया।

पीड़िता ने परिवार के सदस्यों को फोन करके घटना के बारे में सूचित किया। परिजन अगले दिन पीड़िता को वहां से वापस लाए और इस बारे में पुलिस में मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर अदालत में अभियोग चलाया था।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपी के खिलाफ पीड़िता से दुराचार के प्रयास का अभियोग संदेह की छाया से दूर साबित हुआ है। ऐसे में अदालत ने आरोपी को उक्त कारावास और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।
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