हमले वाली रात भी गुलाम भोलाड गांव के ही एक बागवान के बगीचे से काम करके लौटा था। यदि ऐसा कोई मामला होता तो बिना मारपीट किए उनकी तलाशी ले सकते थे। हमले में दस से अधिक लोग शामिल थे।
पुलिस सभी आरोपियों को गिरफ्तार करे। हमले की योजना सुनियोजित थी। जुब्बल के थाना प्रभारी नरेश कुमार ने एक और वन रक्षक की गिरफ्तार की पुष्टि की है।
उन्होंने बताया कि पांच वन रक्षकों समेत छह लोग गिरफ्तारी किए जा चुके हैं। पूछताछ जारी है। हमलावरों के साथ आए अन्य लोग मारपीट में शामिल नहीं थे। अगर जांच में उनकी भी संलिप्तता पाई गई तो गिरफ्तारी हो सकती है।
क्षेत्र में चर्चा है गिरफ्तार पांचों वन रक्षकों की बीटें एक-दूसरे की बीट से कई किलोमीटर की दूरी पर हैं। सभी का एक साथ पहुंचना संदेह पैदा कर रहा है। यदि गुज्जर अवैध लकड़ी के कारोबार में संलिप्त होते तो रात दो बजे बिना
पुलिस और उच्चाधिकारियों को सूचित किए उन्होंने सो रहे परिवारों को हमला क्यों किया। बताया जा रहा है कि हमलावरों के साथ कुछ चिरानी भी थे। सवाल यह उठ रहा है कि चिरान करने वाले कश्मीरियों का वन
रक्षकों के साथ क्या कनेक्शन है जो देर रात उनके कहने पर साथ आ गए। वन विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। पुलिस के अधिकारियों के बयानों से भी आम लोग संतुष्ट नहीं हैं।