हिमाचल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने वर्ष 2007 में विधानसभा चुनाव से पहले आईपीएस एएन शर्मा के वीआरएस मामले को क्लीयर करने की प्रक्रिया में शामिल होने वालों में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल का नाम लिया है।
अधिकारी ने इस संबंध में विजिलेंस को बयान दिया है कि उन्होंने जो कुछ किया वह तत्कालीन मुख्यमंत्री के निर्देश पर किया। अब विजिलेंस ब्यूरो इस अधिकारी को सरकारी गवाह बनाने की तैयारी में है।
विजिलेंस सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का बयान दर्ज किया गया है, जिसमें उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री का नाम लिया है। यह विशेष है कि इसी मामले में विजिलेंस ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल को भी एक प्रश्नावली भेजी है। इस पर अभी जवाब आना बाकी है।
कांग्रेस सरकार ने बिठाई थी जांच
कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने पर विजिलेंस ने एएन शर्मा के वीआरएस मामले को सरकारी शक्तियों का दुरुपयोग बताते हुए इस पर प्रारंभिक जांच बैठाई। फिर मामला दर्ज किया। शर्मा पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल के खास करीबियों में गिने जाते रहे हैं।
वे 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और 30 नवंबर 2011 को रिटायर हुए। विजिलेंस ब्यूरो ने इस मामले में एएन शर्मा की सेवानिवृत्ति की अधिसूचना वापस लेने में गृह विभाग की भूमिका पर भी उंगली उठाई है। हिमाचल में यह विभाग मुख्यमंत्री के अधीन रहता है।
इस मामले के जांच अधिकारी पुलिस अधीक्षक रमेश छाजटा ने कहा कि इस मामले की जांच अंतिम चरण में है। उन्होंने माना कि इस मामले में संबंधित अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। हालांकि, उन्होंने दर्ज बयान पर कोई टिप्पणी नहीं की।
क्या है मामला?
एएन शर्मा पर आरोप हैं कि वह वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की तरफ से नादौन निर्वाचन क्षेत्र से टिकट के दावेदार थे। उन्होंने टिकट लेने की प्रक्रिया के बीच वीआरएस को आवेदन किया।
उन्हें सेवानिवृत्ति देने की अधिसूचना को सरकार ने बाद में विदड्रा कर लिया था। टिकट नहीं मिलने के बाद एएन शर्मा पुलिस सेवा में लौट आए। शर्मा पुलिस विभाग में महत्वपूर्ण पदों पर रहे। उन्हें नगर निगम शिमला का आयुक्त बनाया गया।