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शिमला बसस्टैंड पर लाठीचार्ज की जांच पूरी, पुलिसवालों पर गिर सकती है गाज

Fri, 29 Jul 2016 09:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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शिमला लोकल बस स्टैंड में पुलिस और टैक्सी चालकों के बीच हुए विवाद को लेकर बिठाई गई मजिस्ट्रेट जांच पूरी हो गई है। मंगलवार को जांच अफसर एडीएम (कानून व्यवस्था)  ने 250 पन्ने की रिपोर्ट उपायुक्त को सौंप दी है। रिपोर्ट पढ़ने के बाद उपायुक्त इस पर टिप्पणी लिखकर आगामी कार्रवाई के लिए गृह सचिव को भेजेंगे।
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शिमला पुलिस पर बेगुनाह लोगों की बेवजह पिटाई करने के आरोपों को लेकर इस मामले में मजिस्ट्रेट जांच बिठाई गई थी। तत्कालीन डीएसपी ट्रैफिक अमित ठाकुर और पुलिस महकमे के क्यूआरटी दस्ते पर मारपीट के आरोप लगाए गए। हालांकि इस पूरे मामले में थाना सदर में भी दोनों पक्षों की ओर से क्रास एफआईआर दर्ज है।    

250 पन्ने की इस जांच रिपोर्ट में दोनों पक्षों के अलावा चश्मदीदों और घटना के समय चोटिल हुए लोगों के बयान भी दर्ज हैं। रिपोर्ट में साफ है कि इस घटनाक्रम को रोका जा सकता था। घटना की मुख्य वजह टैक्सी चालक की ओर से बीच सड़क पर गाड़ी खड़ी करना था। तत्कालीन डीएसपी ट्रैफिक और टैक्सी चालक के बीच बहस हुई। बहस होने के बाद ही मामले ने तूल पकड़ा।
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इस दौरान सदर पुलिस के मौके पर आने के बाद मामला सुलझा लिया था। इसके बाद डीएसपी ट्रैफिक का भी डीडीयू अस्पताल में मेडिकल करवाया जा रहा था। इसके बाद ही पुलिस का क्यूआरटी दस्ता  मौके पर पहुंचा और वहां मौजूद लोगों के साथ धक्कामुक्की हुई। इस दौरान कुछ यात्री और अन्य लोग भी चोटिल हो गए। इनमें से चार लोगों को चोटें आईं। चिकित्सकों की रिपोर्ट ने चोटों को सत्यापित किया है।  

क्यूआरटी पर ये हैं आरोप  
आरोप हैं कि तत्कालीन डीएसपी ट्रैफिक अमित ठाकुर और उनके ड्राइवर पर  हुए हमले के बाद मौके पर पहुंची क्यूआरटी के जवानों ने लाठियां भांज डाली। इसकी चपेट में बेकसूर लोग भी आ गए।  एक दर्जन लोगों के घायल होने की बात कही गई थी लेकिन जांच में चार लोग की चोटिल पाए गए हैं। पुलिस की इस कार्रवाई की शिकायत  कुछ लोगों उपायुक्त शिमला  से की थी  शिकायत सुनने के बाद उपायुक्त ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए थे

विवाद के बाद डीएसपी का ट्रांसफर
प्रदेश पुलिस मुख्यालय में इस पूरे मामले में एसपी शिमला से रिपोर्ट तलब की।  एसपी की ओर से रिपोर्ट दे दी गई है और इसमें उन्होंने डीएसपी ट्रैफिक को यहां से बदलने के लिए कहा गया था। इस घटना के कुछ दिनों बाद  डीएसपी अमित ठाकुर का तबादला कर दिया गया था।

चार मई की रात हुई घटना
घटना चार मई बुधवार रात करीब साढ़े नौ बजे की है। डीएसपी ट्रैफिक अमित ठाकुर अपने ड्राइवर के साथ घर जा रहे थे। लोकल बस स्टेंड में बीच सड़क पर एक टेंपो ट्रैवल खड़ा हुआ था। उस साइड लेने के लिए ड्राइवर ने दो बार हूटर बजाए लेकिन वह नहीं हिला। डीएसपी के साथ पीएसओ नहीं था। लिहाजा डीएसपी खुद गाड़ी से उतरे और उन्होंने ड्राइवर से गाड़ी को बीच सड़क पर खड़ी करने की वजह पूछी। जो ड्राइवर को नागवार गुजरी और वह डीएसपी से उलझ पड़ा।

डीएसपी वर्दी में थे। आरोप है कि ड्राइवर ने उनकी वर्दी पर हाथ डाला उनके बटन टूट गए और डंडे से हमला किया। इस बीच डीएसपी और उनके  ड्राइवर ने आरोपी पर काबू पाया आरोप है कि इस दौरान एक दूसरे टैक्सी चालक ने भी हमला किया उसे भी मौके पर पकड़ कर ट्रैफिक कंट्रोल रूम ले गए। इस दौरान भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने डीएसपी पर हाथ भी उठाया। किसी तरह उनके ड्राइवर ने भीड़ से बचा कर पुलिस गुमटी में ले गए और तब तक सदर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी।  

ये थे डीएसपी पर आरोप
रात साढ़े नौ बजे चंडीगढ़ से एक टेंपो पुराने बस अड्डे पहुंचा ही था कि पुलिस की एक नीली बत्ती लगी गाड़ी पहुंची। टेंपो चालक पवन कुमार के मुताबिक गाड़ी में डीएसपी ट्रैफिक समेत कुछ अन्य जवान सवार थे।  डीएसपी ने अपनी गाड़ी से उतरकर उसे गाड़ी का शीशा खोलने को कहा। उन्होंने शीशा खोला तो और पूछा कि क्या बात है। इतना कहते ही डीएसपी भड़क गए और अनाप शनाप कहने लग गए। विरोध किया तो मारपीट पर उतर आए। चालक का आरोप है कि डीएसपी समेत अन्य पुलिस कर्मी गाड़ी में मारते - मारते उसे लोकल बस स्टैंड ले गए। जहां पर पुलिस कर्मियों ने पहले तो टैक्सी चालक अमित की गाड़ी का शीशा तोड़ा और फिर मारपीट की।

रिपोर्ट पहुंची : ठाकुर
उपायुक्त रोहन चंद ठाकुर ने कहा कि उनके पास रिपोर्ट पहुंच गई है। इस पूरे प्रकरण में पुलिस की क्या भूमिका रही है इसका पता रिपोर्ट पढ़ने के बाद ही चल पाएगा। रिपोर्ट पर अपनी टिप्पणी लिखने के बाद वह इसे गृह सचिव को भेज देंगे। 
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