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सिगरेट के लिए दोस्त की हत्या करने वाले को उम्रकैद

Fri, 22 Apr 2016 04:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने गैर इरादतन हत्या को हत्या में तब्दील करते हुए अतुल ठाकुर को उम्र कैद की सजा सुनाई है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने गैर इरादतन हत्या को हत्या में तब्दील करते हुए अतुल ठाकुर को उम्र कैद की सजा सुनाई है। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने मृतक हितेश के पिता राजेंद्र सिंह की अपील को मंजूर करते हुए यह सजा सुनाई।
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सत्र न्यायाधीश (वन) शिमला के निर्णय को मृतक के पिता ने यह कह कर चुनौती दी थी कि उसके बेटे को जानबूझ कर मारा गया है। निचली अदालत ने दोषी को बेहद कम सजा सुनाई थी। मामले के अनुसार 27 जुलाई 2011 को हितेश अपनी मोटरसाइकिल पर समरहिल से कंप्यूटर कोर्स के लिए गया था।

बाद में वह अपने मित्रों के साथ पार्टी मनाने के उददेश्य से घर नहीं आया। रात को तीन बजे दोषी अतुल ने शिकायत कर्ता को बताया कि उनके बेटे को आईजीएमसी में लाया गया है। उसकी हालत ठीक नहीं है। जब पिता आईजीएमसी पहुंचा तो पता चला कि उसका बेटा पहले ही मर चुका था।
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सिगरेट को लेकर हुई थी हितेश की हत्या

सिगरेट पीने के कारण यह सारी घटना घटी और अतुल ने हितेश पर पार्टी के दौरान चाकू से हमला कर दिया।
पिता ने पाया कि उसके बेटे के शरीर पर जगह-जगह चोटों के निशान थे और खून बह रहा था। चोटों से यह लग रहा था कि किसी धारधार हथियार से उसके बेटे पर हमला किया गया था। इस दौरान यह पाया गया कि सिगरेट पीने के कारण यह सारी घटना घटी और अतुल ने हितेश पर पार्टी के दौरान चाकू से हमला कर दिया।

पार्टी एक अन्य आरोपी मुकेश के घर पर आयोजित की गई थी। इस मामले में मुकेश ठाकुर, नितेश शर्मा और संदीप कुमार को भी आरोपी बनाया गया था। लेकिन इन्हें साक्ष्यों के अभाव में छोड़ दिया गया। अभियोजन पक्ष ने मामले में हत्या को साबित करने के लिए 25 गवाह पेश किए। लेकिन निचली अदालत ने इसे गैर इरादतन हत्या का मामला माना।

उल्लेखनीय है कि सरकार ने इस मामले में कोई अपील दायर नहीं की। मजबूरन मृतक पुत्र को इंसाफ दिलाने के लिए पिता ने हाईकोर्ट में अपील के माध्यम से दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने पाया कि मामले से जुड़े रिकार्ड और साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि यह मामला गैर इरादतन हत्या के बजाए हत्या का मामला है।

हाईकोर्ट ने अतुल ठाकुर की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए मृतक के पिता की अपील को मंजूर कर लिया। हालांकि मृतक के पिता ने मुकेश ठाकुर, नितेश शर्मा और संदीप कुमार को बरी करने के फैसले पर भी आपत्ति जताई थी। मगर कोर्ट ने उन्हें बरी किए जाने के फैसले को सही ठहराया।
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