हैदराबाद की चिलचिलाती गर्मी से राहत पाने के लिए कुल्लू-मनाली की वादियों में पिकनिक पर जा रहे बीएनआर दिव्य ज्योति इंजीनियरिंग कॉलेज के 44 छात्र-छात्राएं इस बात से अनजान थे कि व्यास नदी का अचानक जलस्तर बढ़ सकता है।
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नदी के किनारे पानी में मस्ती करना जानलेवा हो सकता है। 24 साथियों के लापता होने से स्टूडेंट व टीचर गहरे सदमे में हैं। नदी के बहाव से बच निकले छात्र-छात्राओं का रो-रो कर बुरा हाल है।
हैदराबाद से बीएनआर दिव्य ज्योति इंजीनियरिंग कॉलेज के बीटेक छात्रों का ग्रुप शिमला की वादियों में घूमने के बाद रविवार सुबह मनाली के लिए रवाना हुआ।
मातम में बदली मस्ती
शाम करीब साढ़े पांच बजे दो बसों में सवार छात्र-छात्राएं थलौट के खारानाल के पास रुके। बस को सड़क किनारे खड़ी करने के बाद सभी छात्र-छात्राएं नदी के किनारे व्यास नदी में के पानी में मस्ती करने लगे।
कोई अपने मोबाइल फोन से व्यास नदी की लहरों का फोटो खींचने लगा तो कोई एक-दूसरे पर पानी फेंकने लगा। स्टूडेंट इस बात से पूरी तरह अनजान थे कि अचानक व्यास नदी का जलस्तर बढ़ना उनकी जान के खतरा बन सकता है।
खुद ही कर रहे साथियों की तलाश
सवा छह बजे डैम के गेट खुलते ही व्यास नदी उफान पर आ गई। जलस्तर बढ़ने से नदी के किनारे मस्ती कर रहे छात्र-छात्राएं हड़बड़ा गए। कुछ छात्र-छात्राएं तो पानी के तेज बहाव की चपेट में आने से बच गए, लेकिन 24 छात्रों का अभी तक कोई पता नहीं लग पाया है। जिसमें छह लड़कियां भी हैं।
बीएनआर दिव्य ज्योति कॉलेज के बीटेक छात्र रमन व सुरजन के आंखों में साथियों के लापता होने का गुम छलक रहा था। रोते हुए बताया कि उनके 24 साथी व्यास नदी में बह गए। रमन ने मोबाइल फोन से डीसी कुल्लू से संपर्क कर मदद की गुहार लगाई। रमन व सुरजन का कहना है कि हादसे के डेढ़ घंटे के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली। खुद ही नदी के किनारे साथियों की तलाश करते रहे।
नहीं की एनाउंसमेंट
लारजी डैम प्रबंधन और हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड के अफसरों ने लापरवाही की सारी सीमाएं तोड़ दी। सूत्रों का कहना है कि राज्य बिजली बोर्ड के अफसरों ने लारजी डैम से पानी छोड़ने से पहले जरूरी प्रोटोकाल को फालो नहीं किया। उन्हें पानी छोड़ने से पहले नीचे के इलाके तक एनाउंस करना चाहिए था।
आसपास कोई नजर आए तो उसे हटाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया तभी यह हादसा हुआ है। बोर्ड की ओर से एक नहीं बल्कि तीन बार थोड़े-थोड़े समय बाद डैम से पानी छोड़ा गया। घटना होने के बाद बिजली बोर्ड के स्थानीय अधिकारियों के पास सूचना आ गई थी।
लेकिन उस सूचना को समय से न तो बिजली बोर्ड के प्रबंधन निदेशक को दी गई और न ही सरकार तक पहुंचाई गई। वैसे भी डैम के आसपास के इलाके में जाना प्रतिबंधित होता है। ऐसे में सवाल यह है कि ये छात्र डैम के पास कैसे पहुंचे। यह भी एक अलग जांच का विषय है।
'हमने एनाउंस किया था'
राज्य विद्युत बोर्ड के प्रबंध निदेशक पीसी नेगी ने कहा कि ग्रिड में बिजली की मांग कम हो गई थी, जिसके बाद स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) ने राज्य विद्युत बोर्ड को उत्पादन कम करने के लिए कहा। जबकि, तेज गर्मी पड़ने के कारण डैम में जल स्तर पहले से ही अधिक हो गया था।
ऐसी स्थिति में बोर्ड की ओर से डैम के भीतर का पानी तीन बार में छोड़ा गया। इससे पहले एनाउंस भी किया गया। यह एक रूटीन का काम है, जिसके बारे में स्थानीय लोगों एलर्ट हो जाते है। बाहर से आए छात्र उस एनाउंस पर ध्यान नहीं दिया। इससे यह हादसा हुआ है। अगर पानी नहीं छोड़ा जाएगा तो बिजली उत्पादन करने वाली मशीनें टूट जाएंगी। इसी लिए डैम से पानी छोड़ा जाता है।
बोर्ड के प्रबंध निदेशक को तत्काल मौके पर जाकर छानबीन करने का निर्देश दिया गया है। उनसे पूरे प्रकरण की पड़ताल करने के बाद सरकार को रिपोर्ट देने के लिए कहा गया। इस प्रकरण में अगर किसी अफसर की गलती पाई गई तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -एसकेबीएस नेगी, प्रधान सचिव ऊर्जा