मुजफ्फरनगर के शाहपुर में हुए चर्चित गैंगरेप के मामले में पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार कर वारदात का खुलासा कर दिया है। इस मामले में लापरवाही बरतने पर सस्पेंड किए गए एसओ हिंदवीर सिंह के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कर ली गई है। इस मामले को लेकर भाकियू ने सोमवार (आज) की अपनी पंचायत स्थगित कर दी है।
शाहपुर के बसी रोड स्थित कब्रिस्तान में तीन जून की रात बागपत मायके से लौट रही महिला से गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया गया था।
इस चर्चित मामले में रविवार की दोपहर पुलिस लाइन सभागार में हुई प्रेसवार्ता में डीएम कौशलराज शर्मा और एसएसपी एचएन सिंह ने जानकारी दी कि आरोपियों से की गई पूछताछ में पता लगा कि कुल 11 लोगों ने महिला से गैंगरेप किया था।
11 आरोपियों में एक नाबालिग
इनमें से छह आरोपियों शाहपुर के मुहल्ला कस्सावान निवासी आदिल पुत्र नौशाद, वसीम पुत्र छंग्गा, शहजाद पुत्र महमूद, सोनू पुत्र बाला, शमशाद पुत्र रहीस के साथ ही छठे आरोपी 16 वर्षीय किशोर को गिरफ्तार किया है। पांच अन्य आरोपी अभी फरार हैं।
नाबालिग आरोपी का मामला अलग से जुवेनाइल कोर्ट भेजा जा रहा है। वारदात का खुलासा करने वाली टीम को आईजी मेरठ आलोक शर्मा ने 10 हजार रुपये और एसएसपी एचएन सिंह ने पांच हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है।
उधर, इस मामले में लापरवाही बरतने वाले छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जा चुका है। सस्पेंड किए गए शाहपुर के एसओ हिंदवीर सिंह के खिलाफ अपने दायित्व में लापरवाही बरतने पर धारा 166 क(ग) के तहत अभियोग भी पंजीकृत किया गया है। एक अन्य जानकारी में भाकियू सुप्रीमो नरेश टिकैत ने छह की गिरफ्तारी होने पर सोमवार (आज) की प्रस्तावित पंचायत को स्थगित करने का ऐलान किया है, जिससे प्रशासन ने राहत की सांस ली है।
हैवानियत का नंगा नाच
मुजफ्फरनगर के शाहपुर में हुए गैंगरेप में हैवानियत का ऐसा नंगा नाच हुआ कि मानवता शर्मसार हो गई। परत दर परत मामला खुला तो आरोपियों के गिरेबान तक पुलिस के हाथ पहुंच गए। वारदात में 11 लोग शामिल रहे।
मंगलवार को बागपत से अपने मायके लौटती अकेली महिला को बसी के कब्रिस्तान में खींच लिया गया। महिला से सामूहिक दुष्कर्म किया गया। महिला की चीख-पुकार सुनकर नेपाली चौकीदार ने शोर मचाया। बाद में पुलिस ने महिला को कब्रिस्तान से थाने पहुंचाया।
मामले को दबाने में लगी थी पुलिस
शुरुआत में पुलिस मामले को दबाने के लिए महिला को विक्षिप्त बताती रही। तीसरे दिन मामले के तूल पकड़ने पर पुलिस हरकत में आई। क्राइम ब्रांच को लगाया गया।
लापरवाही का आलम यह कि दो दिन तक चले बवाल के बावजूद घटनास्थल से वारदात के
सुबूत नहीं जुटाए गए। इसका फायदा उठाते हुए घटनास्थल से वारदात के काफी
सुबूतों को मिटा दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक घटनास्थल पर मौजूद एक
तख्त और बेंच पर भी खून के निशान थे, आरोपियों ने रातोंरात घटनास्थल पर
पड़े तख्त और बेंच को पानी से धोकर साफ कर दिया। शनिवार को डीआईजी रघुवीर
लाल घटनास्थल पर पहुंचे तो वहां केवल खून सनी मिट्टी ही मिली, जिसे कब्जे
में लिया गया।