7 अप्रैल 2015 को विभागीय पदोन्नति कमेटी की बैठक हुई, जिसमें प्रमोशन के लिए रिसर्च असिस्टेंट और सीनियर असिस्टेंट के अलग-अलग नियुक्ति और प्रमोशन नियम मर्ज कर दिए। विजिलेंस को लिखे पत्र में संगठन ने आरोप लगाया कि इन दोनों पदों से रिसर्च असिस्टेंट बनाने के लिए न तो कोई प्रमोशन का कोटा था और न रिक्ति।
इन पदों को प्रमोशन से भरने का 30 प्रतिशत कोटा भी 1997 में क्लर्क, सीनियर असिस्टेंट और जूनियर असिस्टेंट को प्रमोशन देकर खत्म कर दिया। संगठन अध्यक्ष संजय ठाकुर ने आरोप लगाया कि विभागीय सचिव ने जांच की, लेकिन बाद में ठंडे बस्ते में चली गई, जिसके बाद अब ठाकुर ने विजिलेंस से शिकायत कर दी। विजिलेंस ने भी इसे आपराधिक षड्यंत्र के बजाय विभागीय अनियमितता मानते हुए मामला जांच के लिए भाषा निदेशालय को भेज दिया।
अब वर्तमान निदेशक खुद ही पूर्व निदेशक के खिलाफ जांच करेंगे। विजिलेंस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न लिखने की शर्त पर कहा कि ब्यूरो आपराधिक प्रवृत्ति के मामलों की जांच करता है, लेकिन जिन मामलों में प्रोसीजरल लैप्स हुआ हो, उन्हें संबंधित विभाग को भेज दिया जाता है। इस मामले में भी विभागीय चूक की बात सामने आई है इसलिए जांच विभाग को भेजी गई है।