बैटरी बनाने वाले उद्योगपतियों ने टैक्सी चालक, हेल्पर और फैक्टरी कर्मचारी को जाली दस्तावेजों की मदद से मालिक दर्शाकर कागजों में करीब 150 करोड़ रुपये का लेनदेन दिखा दिया। इस पर करीब 15 करोड़ रुपये का जीएसटी बनता है।
विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया है। उन्होंने बताया कि यदि दोनों आरोपी पांच करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी के लिए दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें पांच साल तक का कारावास हो सकता है।
कोर्ट में सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुश दास ने विभाग का पक्ष रखा। डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि विभाग के पास आरोपियों को रखने के लिए जगह नहीं है इसलिए इन्हें परवाणू थाना के सुपुर्द किया गया है। दोनों आरोपियों से विभागीय टीम थाने में ही पूछताछ करेगी।