निजी कंपनियों में महंगी गाड़ियां लगवाने के नाम पर ठगों का निशाना बनने और फाइनेंस कंपनियों की धमकियां झेल रहे पीड़ितों ने स्थानीय पुलिस थानों में मदद की गुहार लगाई लेकिन पुलिस ने लेनदेन का मामला बताकर उन्हें बेरंग लौटा दिया। इसके बाद पीड़ितों ने सीएम कार्यालय से संपर्क किया।
सीएम कार्यालय के निर्र्देश के बाद विजिलेंस हरकत में आई और अब इस बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है। उधर, मामला दर्ज होने के बाद आरोपियों की तलाश के लिए डीएसपी विजिलेंस सोलन संतोष कुमार के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई। टीम ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जिनमें कालका निवासी सुशील कुमार, पटियाला निवासी सुखवीर और मोहाली का हरदीप ब्रार शामिल है।
इनके पास से ठगी के शिकार लोगों के नाम पर खरीदी गई एक फॉक्सवोगन कंपनी की एमियो कार, एक ब्रीजा और एक बलीनो कार बरामद हुई है। एडीजी विजिलेंस अनुराग गर्ग ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी फर्जी नाम से ठगी का गोरखधंधा चला रहे थे।
सुखबीर का असली नाम विमल कालरा है वह धोखधड़ी के कई मामलों में हिमाचल समेत कई राज्यों की पुलिस के निशाने पर था और बचने के लिए सुखबीर नाम से लोगों से मिलता था।
वहीं, एक अन्य आरोपी सुशील का भी असली नाम अमित बताया जा रहा है। एडीजी विजिलेंस ने कह कि मामले की जांच जारी है और कई अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी हो सकती है। अब तक की जांच के अनुसार आरोपी ऐसे लोगों को अपना निशाना बनाते थे जो बेहद गरीब या कम पढ़े लिखे हो।
इसके बाद इनके नाम पर फार्च्युनर, स्कॉर्पियो, सफारी जैसी लग्जरी गाड़ियों की खरीद करते थे। खास बात यह है कि यह गाड़ियां उनके नाम पर खरीदी जाती थी जिनमें से कई के सर पर अपनी छत तक नहीं थी।